छठ पूजा

Table of Contents

छठ पूजा पर निबंध (Essay on Chhath Puja in Hindi)

भूमिका (Introduction)

भारत त्योहारों का देश है। यहाँ हर धर्म, हर प्रांत और हर समुदाय के अपने-अपने पर्व हैं, जो न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े हैं बल्कि प्रकृति, परिवार और समाज के बीच एकता का संदेश भी देते हैं।
इन्हीं पवित्र पर्वों में से एक है — छठ पूजा, जिसे सूर्य उपासना का महापर्व कहा जाता है।

छठ पूजा बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में सबसे अधिक मनाई जाती है। लेकिन आज यह पर्व भारत के लगभग हर राज्य और विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भी पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।

छठ पूजा का अर्थ और नाम की उत्पत्ति (Meaning and Origin of the Name)

‘छठ’ शब्द संस्कृत के “षष्ठी” शब्द से बना है, जिसका अर्थ है “छठा दिन”।
यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।

यह दिन सूर्य भगवान और उनकी बहन छठी माई (देवी ऊषा) को समर्पित है।
इस दिन भक्तजन सूर्य देव की उपासना करके उनसे परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतानों की दीर्घायु की कामना करते हैं।

छठ पूजा का इतिहास और पौराणिक कथा (History and Mythology of Chhath Puja)

पौराणिक संदर्भ (Mythological Background)

छठ पूजा का उल्लेख रामायण और महाभारत दोनों में मिलता है।

  1. रामायण के अनुसार:
    भगवान राम और माता सीता जब वनवास से लौटे, तब उन्होंने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य देव की पूजा की थी।
    उसी समय से यह पर्व लोक आस्था का हिस्सा बन गया।
  2. महाभारत के अनुसार:
    पांडवों की माता कुंती और द्रौपदी ने भी सूर्य देव की आराधना की थी।
    सूर्य ने उन्हें स्वास्थ्य और शक्ति प्रदान की थी।
  3. अन्य मान्यता:
    लोककथाओं के अनुसार, सूर्य देव की बहन छठी माई संतान की रक्षा करती हैं और उनकी आयु लंबी करती हैं।
    इसलिए यह पर्व विशेष रूप से माताएँ अपनी संतानों की भलाई के लिए करती हैं।

छठ पूजा की वैज्ञानिक मान्यता (Scientific Significance)

छठ पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  1. सूर्य ऊर्जा का लाभ:
    सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें (UV Rays) शरीर के लिए लाभकारी होती हैं।
    जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा और विटामिन-D की प्राप्ति होती है।
  2. डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया:
    व्रत और उपवास से शरीर की शुद्धि होती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है।
  3. मानसिक शांति:
    ध्यान, भक्ति और संकल्प के कारण मन में एकाग्रता और मानसिक शांति आती है।
  4. पर्यावरण संतुलन:
    सूर्य और जल की पूजा के माध्यम से मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित होता है।

छठ पूजा की अवधि और मुख्य तिथियाँ (Duration and Days of the Festival)

छठ पूजा कुल चार दिनों तक चलती है। हर दिन की अपनी विशेष परंपरा और महत्व है।

पहला दिन – नहाय-खाय (Nahay-Khay)

  • पहले दिन व्रती (व्रत करने वाला व्यक्ति) नदी या तालाब में स्नान करता है।
  • घर को साफ-सुथरा किया जाता है।
  • व्रती केवल एक समय शुद्ध शाकाहारी भोजन (कद्दू-भात, चना दाल) ग्रहण करता है।
  • यही दिन छठ पूजा की शुरुआत का प्रतीक है।

दूसरा दिन – खरना (Kharna)

  • यह सबसे पवित्र और कठिन दिन माना जाता है।
  • इस दिन व्रती पूरे दिन निराहार (बिना भोजन या जल) रहता है।
  • शाम को सूर्यास्त के बाद पूजा के बाद ‘खरना प्रसाद’ (गुड़ की खीर, रोटी, केला) खाता है।
  • इसके बाद यही प्रसाद परिवार और पड़ोस में बाँटा जाता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)

  • इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखता है।
  • शाम के समय नदी, तालाब या घाट पर जाकर अस्ताचल (डूबते) सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
  • पूरा वातावरण “छठ मइया” के गीतों और भक्ति में डूब जाता है।

चौथा दिन – उगते सूर्य को अर्घ्य (Usha Arghya)

  • यह सबसे महत्वपूर्ण दिन है।
  • व्रती सुबह तड़के घाट पर जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य देता है।
  • इसके बाद पूजा समाप्त होती है और व्रत तोड़ा जाता है।
  • इसी के साथ चार दिन का यह महापर्व पूर्ण होता है।

छठ पूजा की तैयारी (Preparation for Chhath Puja)

छठ पूजा की तैयारी एक सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है।

  1. घर की सफाई:
    पूरा घर पवित्र और स्वच्छ किया जाता है।
  2. घाटों की सजावट:
    घाटों पर साफ-सफाई, सजावट, दीपों और फूलों से सुंदर माहौल बनाया जाता है।
  3. पूजा सामग्री:
    • बाँस की टोकरी (सूप)
    • ठेकुआ, लड्डू, केला, नारियल, गुड़, गन्ना, फल
    • दूध, चावल, दीपक, अरवा चावल, फूल, जल पात्र
  4. संगीत और भक्ति गीत:
    पारंपरिक छठ गीत गाए जाते हैं जैसे –
    “केलवा जे फरेला घवद से…” या “छठी मइया आयी अंगना…”

छठ पूजा के नियम और अनुशासन (Rituals and Discipline)

  • व्रती को पूरी तरह शुद्धता और सत्यनिष्ठा का पालन करना होता है।
  • पूजा में किसी भी तरह की अशुद्धि नहीं होनी चाहिए।
  • व्रती न तो मांस-मदिरा का सेवन करता है और न ही प्याज-लहसुन का उपयोग।
  • पूरे व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य होता है।

छठ पूजा में प्रसाद का महत्व (Importance of Prasad)

छठ पूजा के प्रसाद का विशेष महत्व है।
यह पूरी तरह घर में बनाया गया सात्विक भोजन होता है — बिना नमक, प्याज या लहसुन के।

मुख्य प्रसाद:

  1. ठेकुआ: गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बना पारंपरिक पकवान।
  2. खरना प्रसाद: गुड़ की खीर और रोटी।
  3. फलों का प्रसाद: केला, सेब, गन्ना, नारियल, नींबू आदि।

इन प्रसादों को व्रती बड़ी श्रद्धा से तैयार करता है और इन्हें बाँस की टोकरी में सजाकर अर्घ्य के समय सूर्य को अर्पित करता है।

छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले लोकगीत (Folk Songs and Culture)

छठ पूजा में गीतों का विशेष स्थान है।
भक्तजन ‘छठ मइया’ की महिमा का गुणगान करते हैं।

कुछ प्रसिद्ध लोकगीत हैं:

  • “छठी मइया तोहर महिमा अपार…”
  • “केलवा जे फरेला घवद से…”
  • “उग हो सूरज देव…”

इन गीतों में प्रकृति, परिवार और आस्था की झलक दिखाई देती है।

छठ पूजा का सामाजिक महत्व (Social Importance of Chhath Puja)

  1. समानता और एकता का प्रतीक:
    इस पर्व में अमीर-गरीब, ऊँच-नीच, जात-पात का कोई भेद नहीं होता।
    सभी लोग एक साथ घाट पर पूजा करते हैं।
  2. स्वच्छता का संदेश:
    यह त्योहार साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है।
  3. नारी शक्ति का प्रतीक:
    छठ पूजा मुख्य रूप से महिलाएँ करती हैं, जो नारी की शक्ति, सहनशीलता और आस्था का प्रतीक है।
  4. परिवारिक प्रेम और एकता:
    व्रती अपने पूरे परिवार के लिए व्रत रखती है — जिससे घर में प्रेम और एकता बढ़ती है।

आज का छठ पूजा (Chhath Puja in Modern Times)

आज के समय में छठ पूजा का स्वरूप बदल गया है, लेकिन इसकी भावना वैसी ही है।
बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत और विदेशों में भी यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है।

सरकारें भी छठ पर्व के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएँ करती हैं —

  • घाटों की सफाई
  • सुरक्षा बलों की तैनाती
  • बिजली और पानी की सुविधा

यह पर्व अब केवल धार्मिक नहीं बल्कि संस्कृतिक और सामाजिक उत्सव बन चुका है।

छठ पूजा और पर्यावरण संरक्षण (Chhath Puja & Environment)

छठ पूजा प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है।
यह हमें यह सिखाता है कि —
“मनुष्य और प्रकृति का रिश्ता एक-दूसरे के बिना अधूरा है।”

जल, सूर्य, वायु और पृथ्वी — इन चारों तत्वों की पूजा कर हम पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, यह शुद्धता, संयम, नारी शक्ति और प्रकृति प्रेम का उत्सव है।
यह त्योहार बताता है कि सच्ची भक्ति में दिखावा नहीं, बल्कि निष्ठा, अनुशासन और आस्था की शक्ति होती है।

आज के समय में जब लोग आधुनिकता में व्यस्त हैं, छठ पूजा हमें हमारी संस्कृति की जड़ों से जोड़ती है।
सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ हम अपने जीवन में ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मकता को आमंत्रित करते हैं।

“सूर्य देव हमें प्रकाश दें, छठ मइया हमें शक्ति दें, और यह पर्व हमारे जीवन में खुशहाली लाए।”

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