भारत की विरासत: प्रकृति और संस्कृति
1. परिचय: भारत की अनमोल धरोहर
‘विरासत’ का अर्थ है वह बहुमूल्य भेंट जो हमें अपने पूर्वजों से मिलती है। भारत की कहानी हजारों साल पुरानी है, और इस लंबे समय में, हमें एक समृद्ध, प्राचीन और विविध विरासत प्राप्त हुई है जो इसे दुनिया में एक विशेष स्थान दिलाती है।
भारत की इस विशाल धरोहर को बेहतर ढंग से समझने के लिए, हम इसे दो मुख्य भागों में बाँट सकते हैं:
- प्राकृतिक विरासत
- सांस्कृतिक विरासत
आइए, सबसे पहले हम भारत की प्राकृतिक विरासत को समझते हैं।
2. प्राकृतिक विरासत: जो हमें प्रकृति से मिला
प्राकृतिक विरासत, प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच घनिष्ठ संबंधों का परिणाम है। भारत की प्राकृतिक विरासत बहुत अनूठी और विविध है। इसमें मुख्य रूप से चार चीजें शामिल हैं:
- भू-दृश्य (Landscapes): ये प्रकृति द्वारा बनाए गए भूमि के सुंदर आकार हैं। इसका सबसे प्रमुख उदाहरण हिमालय है, जो हमें अपनी बर्फीली चोटियों का उपहार देता है। यह कई नदियों का स्रोत है और अमरनाथ, बद्रीनाथ, तथा केदारनाथ जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों का घर भी है, जो हमारी आस्था के केंद्र हैं।
- नदियाँ (Rivers): नदियाँ प्राचीन काल से ही हमारे लिए प्राकृतिक जलमार्ग रही हैं। गंगा, यमुना, सिंधु, नर्मदा, गोदावरी और कृष्णा जैसी नदियों ने भारतीय जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। इन नदियों के पानी ने न केवल पीने और सिंचाई की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि मिट्टी के बर्तन बनाने, घरों के निर्माण और प्लास्टर जैसे उद्योगों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वनस्पति (Vegetation): इसमें पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियाँ और फूल शामिल हैं। भारतीय लोग प्राचीन काल से ही पर्यावरण प्रेमी रहे हैं। पीपल, बरगद और तुलसी जैसे पेड़-पौधों की आज भी भारत में पूजा की जाती है। इसके अलावा, हरड़, आँवला और एलोवेरा जैसी औषधीय वनस्पतियों ने हमारे जीवन को स्वस्थ और समृद्ध बनाया है।
- वन्य जीवन (Wildlife): भारत की संस्कृति में पशु-प्रेम का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ बाघ, हाथी, गैंडा से लेकर गुजरात के गिर के एशियाई शेरों तक विविध वन्य जीवन पाया जाता है। हमारी धार्मिक मान्यताओं ने भी वन्य जीवन को सम्मान दिया है; बाघ, मोर और मगरमच्छ जैसे कई जानवरों को देवी-देवताओं के वाहन का दर्जा दिया गया है, जो प्रकृति और संस्कृति के गहरे जुड़ाव को दिखाता है।
जहाँ प्रकृति हमें यह सब उपहार देती है, वहीं हमारे पूर्वजों ने भी अपनी कला और बुद्धि से एक अद्भुत विरासत का निर्माण किया है, जिसे हम सांस्कृतिक विरासत कहते हैं।
3. सांस्कृतिक विरासत: जो हमने बनाया
सांस्कृतिक विरासत वह मानव निर्मित विरासत है, जिसे मनुष्य ने अपनी बुद्धि, प्रतिभा, कला और कौशल से बनाया और हमें सौंपा है। यह हमारी आदतों, मूल्यों और रीति-रिवाजों का कुल योग है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत किसी एक समूह ने नहीं बनाई, बल्कि यह एक मिश्रण है। नेग्रिटोइट (हब्शी), ऑस्ट्रेलॉयड (निषाद), मंगोलॉयड (किरात), अल्पाइन, दिनारिक और आर्मेनॉयड जैसी कई अलग-अलग जनजातियों और लोगों के योगदान से यह समृद्ध हुई, जो हजारों वर्षों में यहाँ आए और बस गए। इस विविधता को समझने के लिए कुछ प्रमुख समूहों के योगदान को देखना महत्वपूर्ण है:
- द्रविड़ (Dravidians):
- उन्हें सिंधु घाटी सभ्यता का निर्माता माना जाता है। ‘धूप’ (अगरबत्ती), ‘दीप’ (दीपक), और ‘आरती’ से पूजा करने की परंपरा हमें द्रविड़ों से ही मिली है। उन्होंने नाव और बेड़ा बनाने, कताई, बुनाई और रंगाई जैसी कलाओं और शिल्पों में भी बहुत प्रगति की थी।
- आर्य (Aryans):
- आर्य प्रकृति प्रेमी थे। उन्होंने पेड़ों, नदियों, पहाड़ों, सूर्य, हवा और बारिश जैसे विभिन्न प्राकृतिक तत्वों की प्रार्थना के लिए भजनों (ऋचाओं) की रचना की।
इन विभिन्न संस्कृतियों के लंबे समय तक एक-दूसरे में घुलने-मिलने से ही भारतीय संस्कृति इतनी समृद्ध और संपन्न बनी। अब जब हमने दोनों विरासतों को समझ लिया है, तो आइए इनके बीच के मुख्य अंतर को देखें।
4. प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत में अंतर
इस तालिका से दोनों के बीच का अंतर आसानी से समझा जा सकता है:
| आधार (Basis) | प्राकृतिक विरासत (Natural Heritage) | सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) |
| स्रोत (Source) | यह प्रकृति द्वारा निर्मित है। | यह मानव द्वारा निर्मित है। |
| उदाहरण (Examples) | पहाड़, नदियाँ, जंगल, जानवर | इमारतें, परंपराएं, कला, ज्ञान |
5. निष्कर्ष: एक मिली-जुली विरासत
अंत में, हम यह कह सकते हैं कि भारत की विरासत वास्तव में प्रकृति के उदार उपहारों (जैसे हिमालय और नदियाँ) और सदियों से विभिन्न लोगों के सामूहिक ज्ञान, कौशल और रचनात्मकता का एक सुंदर और अनूठा संगम है। यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपनी इस “समृद्ध और विविध विरासत” को समझें और इसकी रक्षा करें।
भारत की विरासत: एक संक्षिप्त दस्तावेज़
कार्यकारी सारांश
यह दस्तावेज़ भारत की प्राचीन, समृद्ध और विविध विरासत का एक व्यापक संश्लेषण प्रस्तुत करता है, जैसा कि प्रदान किए गए स्रोत संदर्भ में उल्लिखित है। भारत की विरासत प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच घनिष्ठ संबंध का परिणाम है, जिसे सहस्राब्दियों से विभिन्न स्वदेशी और विदेशी संस्कृतियों के सम्मिलन से आकार मिला है। इसे मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: प्राकृतिक विरासत, जिसमें परिदृश्य, नदियाँ, वनस्पति और वन्य जीवन शामिल हैं, और सांस्कृतिक विरासत, जो मानव निर्मित स्मारकों, परंपराओं और कलाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
भारत का वर्तमान सांस्कृतिक ताना-बाना नीग्रिटोइट (हब्सी), ऑस्ट्रेलॉयड (निषाद), द्रविड़, मंगोलॉयड और आर्यों सहित कई लोगों के योगदान का एक जटिल मिश्रण है। द्रविड़ को सिंधु घाटी सभ्यता का निर्माता माना जाता है, जबकि आर्यों ने वैदिक संस्कृति की नींव रखी। इन समूहों के बीच परस्पर मेलजोल और अंतर्जातीय विवाहों ने एक समग्र और समृद्ध भारतीय संस्कृति को जन्म दिया। विशेष रूप से, गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को उसके अद्वितीय मंदिरों, त्योहारों और पारंपरिक मेलों के माध्यम से उजागर किया गया है। अंत में, यह दस्तावेज़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) पर प्रकाश डालता है, जो प्रत्येक नागरिक पर इस अमूल्य विरासत के संरक्षण और परिरक्षण के लिए एक मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है।
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1. भारत की विरासत का परिचय
भौगोलिक और ऐतिहासिक संदर्भ
भारत एक प्राचीन संस्कृति की भूमि है, जिसका ऐतिहासिक विस्तार “विष्णु पुराण” में वर्णित है, जो उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर तक फैला हुआ है। इस ग्रंथ के अनुसार, यहाँ के वंशजों को ‘भारतीय’ कहा जाता है। देश प्राकृतिक सीमाओं से संपन्न है, जिसमें उत्तर में हिमालय और पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में समुद्र शामिल हैं। भारत की समृद्धि और संस्कृति ने दुनिया भर के विभिन्न देशों को आकर्षित किया, जिससे व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुआ। इस पारस्परिक मेलजोल ने भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते रहे।
संस्कृति और विरासत की परिभाषा
- संस्कृति: संस्कृति जीवन जीने का एक तरीका है। यह किसी भी समाज में सार्वजनिक जीवन, सामाजिक नियमों और विनियमों में होने वाले परिवर्तनों का प्रतीक है। इसे आदतों, मूल्यों, रीति-रिवाजों, परंपराओं और आदर्शों का कुल योग कहा जा सकता है जो मनुष्यों को उच्चतम स्तर तक ले जाता है।
- विरासत: विरासत हमारे पूर्वजों से हमें मिला एक बहुमूल्य उपहार है। भारतीय इतिहास हजारों साल पुराना है, और यह विरासत हमारी मातृभूमि से पूरी दुनिया को मिला एक अनमोल उपहार है। इसे दो मुख्य प्रभागों में बांटा गया है।
विरासत के प्रकार
भारतीय विरासत को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- भारत की प्राकृतिक विरासत (Natural heritage of India)
- भारत की सांस्कृतिक विरासत (Cultural heritage of India)
2. भारत की प्राकृतिक विरासत
प्राकृतिक विरासत प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच घनिष्ठ संबंध का परिणाम है। इसमें पर्वत, वन, मरुस्थल, नदियाँ, झरने, समुद्र, पौधे, लताएँ, फूल, पत्ते, कीड़े और विभिन्न जानवर शामिल हैं।
- परिदृश्य (Landscapes): सुंदर परिदृश्य भूमि के विभिन्न आकारों द्वारा बनते हैं। हिमालय एक ऐसा ही परिदृश्य है जिसने भारत को उपयोगी वनस्पति और खनिजों से संपन्न किया है। बर्फ से ढकी चोटियों वाले विचित्र पक्षी और भू-भाग हिमालय का उपहार हैं। अमरनाथ, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे तीर्थ स्थान और नंदादेवी जैसे शिखर हिमालय में स्थित हैं।
- नदियाँ (Rivers): प्राचीन काल से ही नदियाँ प्राकृतिक मार्ग प्रदान करती रही हैं। भारतीय संस्कृति सिंधु और रावी नदियों के तट पर फली-फूली है। गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, नर्मदा, गोदावरी और कृष्णा जैसी नदियों ने भारत के लोगों को बहुत प्रभावित किया है। वे पीने, घरेलू उपयोग, सिंचाई, बिजली उत्पादन और मिट्टी के बर्तन तथा घर बनाने जैसे उद्योगों के लिए पानी के स्रोत हैं।
- वनस्पति (Vegetation): भारतीय लोग प्राचीन काल से ही पर्यावरण प्रेमी रहे हैं। वे पेड़ों, फूलों और पौधों के प्रति अपने प्रेम के लिए जाने जाते हैं। बरगद, पीपल के पेड़ और तुलसी की पूजा की जाती है। अनाज, दालें, तिलहन, हरे-भरे खेत, समृद्ध जड़ी-बूटियों वाले जंगल और औषधीय पौधे भारतीय जीवन को समृद्ध करते हैं। हरड़, आंवला, बहेड़ा, एलोवेरा, अडूसा, नीम आदि औषधीय पौधे हैं, जबकि गुलाब, कमल, मोगरा, डमरो, सूरजमुखी, चंपा, जुई, चमेली जैसे फूलों ने मानव जीवन को सुंदर और सुगंधित बनाया है।
- वन्य जीवन (Wild life): भारत एक प्रकृति प्रेमी देश होने के साथ-साथ पशु प्रेमी संस्कृति भी रखता है। बाघ, शेर, हाथी, गैंडा, लोमड़ी, भालू, हिरण, सांभर, खरगोश, अजगर, सांप, नेवला, छिपकली, साही जैसे कई जीव पाए जाते हैं। गुजरात के गिर के जंगल में एशियाई शेर पाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं ने कुछ जंगली जानवरों को देवी-देवताओं के वाहन का दर्जा दिया है। हमारी राष्ट्रीय मुद्रा में बाघ, मोर, घड़ियाल और चील की आकृतियों को शामिल करके इसके मूल्य को बढ़ाया गया है।
3. भारत: भूमि और लोग
माना जाता है कि भारत में कई विदेशी जनजातियाँ आई और बस गईं, जिससे एक विविध आबादी का निर्माण हुआ।
- नीग्रिटोइट (हब्सी लोग): कुछ इतिहासकारों का मानना है कि नीग्रेटो या नीग्रो भारत के सबसे प्राचीन निवासी हैं। वे बलूचिस्तान के रास्ते अफ्रीका से आए थे। वे काले रंग के थे, जिनकी ऊंचाई 4 से 5 फीट और घुंघराले बाल थे।
- ऑस्ट्रेलॉयड (निषाद लोग): ये लोग दक्षिण-पूर्व एशिया से आए थे। उनकी शारीरिक विशेषताएं थीं: काली त्वचा, चौड़ा सिर, चपटी नाक और छोटा कद। बाद में आने वाले आर्य उन्हें ‘निषाद’ कहते थे। असम की खासी, निकोबार और म्यांमार की जनजातियों की उत्पत्ति ऑस्ट्रेलॉयड से हुई है। उनका भारतीय संस्कृति में योगदान बहुत बड़ा है; उन्होंने मिट्टी के बर्तन बनाना, सूती कपड़े पहनना और कई अन्य कौशल विकसित किए।
- द्रविड़: द्रविड़ को सिंधु घाटी सभ्यता और मोहनजोदड़ो की पाषाण युग की संस्कृति का निर्माता माना जाता है। वे उत्तर से आई जनजातियों के बाद द्रविड़ कहलाए। उन्होंने माता को ‘देवी’ और पिता को ‘देवता’ के रूप में मानने की अवधारणा दी, जिससे पार्वती और शिव की पूजा का विचार विकसित हुआ। इसके अलावा, प्रकृति पूजा और पशु पूजा उनकी संस्कृति की महान विशेषताएं थीं। धूप, दीप और आरती से पूजा करने की परंपरा द्रविड़ों का उपहार मानी जाती है। उनका मातृसत्तात्मक पारिवारिक ढाँचा था। उन्होंने नाव बनाने, कताई, बुनाई और रंगाई जैसे विभिन्न शिल्पों में प्रगति की। आर्यों के प्रभुत्व के कारण, वे दक्षिण भारत में चले गए और बस गए। आज, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी द्रविड़-परिवार की भाषाएँ बोलने वाले लोग देखे जा सकते हैं।
- अन्य जनजातियाँ: मंगोलॉयड, अल्पाइन, दिनारिक और आर्मेनॉयड भी भारत में मौजूद थे।
- मंगोलॉयड (किरात): वे तिब्बत के रास्ते उत्तरी चीन से भारत आए और उत्तरी असम, सिक्किम, भूटान, पश्चिम बंगाल आदि में बस गए। उनकी शारीरिक विशेषताएं पीला रंग, चपटा चेहरा, उभरे हुए गाल और बादाम के आकार की आँखें थीं। उन्हें ‘किरात’ के नाम से जाना जाता था।
- अल्पाइन, दिनारिक और आर्मेनॉयड: ये लोग मध्य एशिया से आकर बसे। इन जनजातियों के मूल गुजरात, सौराष्ट्र, महाराष्ट्र, बंगाल और उड़ीसा में एक बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
- आर्य (नॉर्डिक-आर्य): आर्य भारत में आर्य सभ्यता के निर्माता थे। प्राचीन काल में, हिंदुओं को आर्य कहा जाता था और जिस क्षेत्र में वे घनी आबादी में रहते थे उसे ‘आर्यावर्त’ कहा जाता था। जहाँ सात नदियाँ बहती थीं, उस क्षेत्र को ‘सप्त सिंधु’ नाम दिया गया था। आर्यावर्त का विस्तार पूर्व में मिथिला (बिहार) और दक्षिण में विंध्याचल तक था। वे अपने समकालीनों की तुलना में अधिक उन्नत लोग थे। इस विशाल भूमि को भरतभूमि, भरतखंड और भारतवर्ष जैसे विभिन्न नामों से मान्यता मिली। आर्य प्रकृति प्रेमी थे; वे पेड़ों, नदियों, पहाड़ों, सूर्य, हवा और बारिश की पूजा करते थे। उन्होंने विभिन्न प्राकृतिक तत्वों की स्तुति के लिए ऋचाओं (भजनों) की रचना की थी। वेदों का पाठ और यज्ञ जैसी धार्मिक रस्में प्रचलित थीं।
- संस्कृतियों का सम्मिश्रण: इन जनजातियों के विशिष्ट जीवन शैली और सामंजस्यपूर्ण संस्कृति के साथ एक उत्तम सम्मिश्रण बना, जिसने भारत को एक गौरवशाली और समृद्ध विरासत दी। समय के साथ, इन विदेशी और भारतीय जनजातियों का इस तरह से सम्मिश्रण हुआ कि उन्होंने अंतर्जातीय विवाहों के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत पहचान खो दी। भाषा, लिपि, नामों और धार्मिक विश्वासों जैसी चीजों में परस्पर आदान-प्रदान हुआ, जिससे एक मिश्रित संस्कृति का विकास हुआ।
4. गुजरात की सांस्कृतिक विरासत
गुजरात में कई महत्वपूर्ण धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन-उन्मुख स्थान हैं।
- धार्मिक और सांस्कृतिक स्थान: इनमें द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर, जगद्गुरु शंकराचार्य का शारदापीठ, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर, उत्तर गुजरात में अंबाजी, महेसाणा जिले में बहुचराजी, खेड़ा जिले में रणछोड़राय मंदिर (डाकोर) और अरावली जिले में शामलाजी शामिल हैं।
- त्यौहार और कार्यक्रम: प्रसिद्ध सांस्कृतिक और पर्यटन उन्मुख स्थानों में विजयनगर में पोलो वन, पतंग उत्सव और अहमदाबाद में कांकरिया कार्निवल, वडनगर में ताना-रीरी महोत्सव, मोढेरा में उत्तरी नृत्य महोत्सव और कच्छ में रणोत्सव शामिल हैं।
- जैन और बौद्ध पर्यटन स्थल: गुजरात में जैन और बौद्ध धर्म के कई पर्यटन स्थल हैं, जैसे वडनगर, तारंगा, खंभालिया, शामलाजी, कोटेश्वर, तलाजा, ढांक, झगड़िया आदि।
गुजरात के मेले
गुजरात की विविध संस्कृति इसके पारंपरिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व वाले मेलों में स्पष्ट होती है।
| क्र.सं. | मेले का नाम | मेले का स्थान | मेले की तिथि/समय |
| 1 | मोढेरा मेला | मोढेरा (महेसाणा) | श्रावण वद अमावस्या |
| 2 | बहुचराजी मेला | बहुचराजी (महेसाणा) | चैत्र सुद पूनम |
| 3 | शामलाजी-ठाकोरजी मेला | शामलाजी (अरावली) | कार्तिक सुद 11 से पूनम |
| 4 | भादरवी पूनम मेला | अंबाजी (बनासकांठा) | भादरवी सुद पूनम |
| 5 | भवनाथ मेला | गिरनार (जूनागढ़) | माघ वद 9 से 12 |
| 6 | तरणेतर मेला | तरणेतर (सुरेंद्रनगर) | भाद्रपद 4 से 6 |
| 7 | भड़ियाद मेला | भड़ियाद (अहमदाबाद) | रजब मास दिनांक 9, 10, 11 |
| 8 | नकलांग मेला | कोलिआक (भावनगर) | भाद्रवा वद अमावस्या |
| 9 | माधवपुर मेला | माधवपुर (पोरबंदर) | चैत्र सुद 9 से 13 |
| 10 | वौथा मेला | धोलका (अहमदाबाद) | कार्तिक सुद पूनम |
| 11 | मिरादातार मेला | उनावा (महेसाणा) | रजब मास 16 से 22 |
| 12 | डांग दरबार मेला | आहवा (डांग) | फाल्गुन सुद पूनम |
| 13 | गोल गधेड़ा मेला | गरबाड़ा (दाहोद) | होली के 5 से 7 दिन बाद |
| 14 | कार्तिक पूर्णिमा मेला | सोमनाथ (गिर) | कार्तिक सुद पूनम |
| 15 | भांगुरिया मेला | क्वांट (छोटा उदयपुर) | होली से रंग पंचमी तक |
5. विरासत का संरक्षण और परिरक्षण
भारतीय विरासत का प्रत्येक पहलू आकर्षक, सुरम्य और सुंदर है, जिसने भारत को दुनिया में एक अग्रणी स्थान दिलाया है।
- नागरिक कर्तव्य: अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करना प्रत्येक नागरिक का प्राथमिक और पवित्र कर्तव्य है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी प्राचीन स्मारकों को नुकसान न पहुँचाए और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को संरक्षित रखा जाए।
- संवैधानिक प्रावधान: हमारे संविधान के अनुच्छेद 51 (ए) में, भारतीय नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है। इसमें खंड (6), (7) और (9) हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निम्नलिखित कर्तव्यों का वर्णन करते हैं:
- हमारी सामंजस्यपूर्ण संस्कृति के महत्व को समझना और उसे संरक्षित करना।
- वनों, तालाबों, नदियों, पोखरों और जंगली जानवरों तथा पक्षियों सहित प्राकृतिक पर्यावरण को बनाए रखना और सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा दिखाना।
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा का त्याग करना।
संक्षेप में, भारतीय विरासत एक लंबी अवधि में भारत के लोगों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में हुए विकास का परिणाम है, जिसे प्रकृति ने उदारतापूर्वक संपन्न किया है।
भारत की विरासत: एक अध्ययन मार्गदर्शिका
लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तरी
यह प्रश्नोत्तरी भारत की विरासत की आपकी समझ का आकलन करने के लिए बनाई गई है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 2-3 वाक्यों में दें।
प्रश्न 1: ‘विष्णु पुराण’ भारत के भौगोलिक विस्तार का वर्णन कैसे करता है?
प्रश्न 2: संस्कृति की परिभाषा क्या है और यह मानव जीवन को कैसे प्रभावित करती है?
प्रश्न 3: भारत की प्राकृतिक विरासत के किन्हीं दो मुख्य तत्वों का उदाहरण सहित वर्णन करें।
प्रश्न 4: द्रविड़ लोगों को भारतीय संस्कृति में इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? उनकी धार्मिक मान्यताओं के बारे में संक्षेप में बताएं।
प्रश्न 5: आर्य कौन थे और उन्होंने भारत के किस क्षेत्र को अपना घर बनाया?
प्रश्न 6: ऑस्ट्रेलॉयड (निषाद) लोगों की शारीरिक बनावट कैसी थी और भारतीय संस्कृति में उनका क्या योगदान था?
प्रश्न 7: भारत की विरासत के संरक्षण के लिए भारतीय संविधान में उल्लिखित किन्हीं दो मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख करें।
प्रश्न 8: गुजरात के कुछ महत्वपूर्ण जैन और बौद्ध तीर्थ स्थलों के नाम बताइए।
प्रश्न 9: भारत में नदियों का ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व क्या है?
प्रश्न 10: गुजरात में आयोजित होने वाले किन्हीं चार प्रमुख मेलों के नाम और उनके आयोजन स्थल बताइए।
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उत्तर कुंजी
उत्तर 1: ‘विष्णु पुराण’ में कहा गया है कि भारत समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में स्थित है। इसमें यह भी उल्लेख है कि इस भूमि के वंशज ‘भारतीय’ कहलाते हैं।
उत्तर 2: संस्कृति जीवन जीने का एक तरीका है। यह आदतों, मूल्यों, रीति-रिवाजों, परंपराओं और आदर्शों का कुल योग है जो मानव को उच्चतम स्तर तक ले जाता है। यह सार्वजनिक जीवन, सामाजिक नियमों और विभिन्न समाजों के विनियमों में होने वाले परिवर्तनों से बनती है।
उत्तर 3: भारत की प्राकृतिक विरासत के दो मुख्य तत्व नदियाँ और वनस्पतियां हैं। गंगा, यमुना और सिंधु जैसी नदियाँ पीने के पानी, सिंचाई और उद्योग का स्रोत रही हैं। वनस्पतियों में, पीपल और बरगद जैसे पेड़ों की पूजा की जाती है, और हरडे, बहेड़ा और नीम जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों ने हमारे जीवन को समृद्ध किया है।
उत्तर 4: द्रविड़ लोगों को सिंधु घाटी सभ्यता का निर्माता और पाषाण युग का सीधा वंशज माना जाता है। वे मातृसत्तात्मक पारिवारिक व्यवस्था का पालन करते थे और ‘माँ’ को देवी के रूप में और ‘पिता’ को देवता के रूप में पूजा करने की अवधारणा विकसित की, जिससे शिव और पार्वती की पूजा का विचार उत्पन्न हुआ। धूप, दीप और आरती से पूजा करने की परंपरा भी उन्हीं की देन मानी जाती है।
उत्तर 5: आर्य, जिन्हें नॉर्डिक-आर्यन्स भी कहा जाता है, भारत में आर्य सभ्यता के निर्माता थे। प्राचीन काल में, जिस क्षेत्र में वे घनी आबादी में रहते थे, उसे ‘आर्यावर्त’ कहा जाता था। यह क्षेत्र, जहाँ सात नदियाँ बहती थीं, ‘सप्त सिंधु’ के नाम से जाना जाता था।
उत्तर 6: ऑस्ट्रेलॉयड (निषाद) लोग दक्षिण पूर्व एशिया से आए थे। उनकी शारीरिक विशेषताएं काली त्वचा, चौड़ा सिर, चपटी नाक और छोटा कद थीं। उन्होंने मिट्टी के बर्तन बनाने, सूती कपड़े पहनने और कई अन्य कौशल विकसित करने में भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उत्तर 7: संविधान के अनुच्छेद 51 (A) के अनुसार, विरासत के संरक्षण के लिए दो मौलिक कर्तव्य हैं: (1) हमारी सामंजस्यपूर्ण संस्कृति के महत्व को समझना और उसे संरक्षित करना, और (2) जंगलों, तालाबों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण को बनाए रखना और सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा दिखाना।
उत्तर 8: गुजरात में महत्वपूर्ण जैन और बौद्ध तीर्थ स्थलों में वडनगर, तारंगा, खंभालिया, शामलाजी, कोटेश्वर, तलाजा, ढांक और झगड़िया आदि शामिल हैं।
उत्तर 9: प्राचीन काल से ही नदियों ने भारत को प्राकृतिक मार्ग प्रदान किए हैं। वे पीने के पानी, घरेलू उपयोग, सिंचाई, बिजली उत्पादन और जलमार्गों के लिए स्रोत रही हैं। नदियों के किनारे मिट्टी के बर्तन, प्लास्टरिंग और घरों के निर्माण जैसे उद्योगों के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण थे।
उत्तर 10: गुजरात के चार प्रमुख मेले और उनके स्थान इस प्रकार हैं:
- तरणेतर मेला: तरणेतर (सुरेंद्रनगर)
- भवनाथ मेला: गिरनार (जूनागढ़)
- वौठा मेला: ढोलका (अहमदाबाद)
- शामलाजी-ठाकोरजी मेला: शामलाजी (अरावली)
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निबंधात्मक प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्नों के विस्तृत उत्तर तैयार करें ताकि विषय की गहरी समझ विकसित हो सके। (उत्तर प्रदान नहीं किए गए हैं)
- “भारत विभिन्न संस्कृतियों का संगम है।” भारत में आई विभिन्न जनजातियों (नेग्रिटोइट, ऑस्ट्रेलॉयड, द्रविड़, मंगोलॉयड, आर्य आदि) के योगदानों के संदर्भ में इस कथन की विस्तृत व्याख्या करें।
- भारत की ‘समृद्ध और विविध विरासत’ से आप क्या समझते हैं? प्राकृतिक विरासत (भूदृश्य, नदियाँ, वनस्पति, वन्यजीव) और सांस्कृतिक विरासत के बीच संबंधों और अन्योन्याश्रयता पर विस्तार से चर्चा करें।
- गुजरात की सांस्कृतिक विरासत पर एक विस्तृत लेख लिखें, जिसमें उसके प्रमुख धार्मिक स्थलों, पर्यटन आकर्षणों और प्रसिद्ध मेलों की सांस्कृतिक और सामाजिक प्रासंगिकता पर विशेष ध्यान दिया गया हो।
- विरासत का संरक्षण और परिरक्षण प्रत्येक नागरिक का एक पवित्र कर्तव्य क्यों है? इस संबंध में संवैधानिक प्रावधानों और हमारी व्यक्तिगत एवं सामूहिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालें।
- द्रविड़ और आर्य संस्कृतियों की मुख्य विशेषताओं का तुलनात्मक विश्लेषण करें। चर्चा करें कि कैसे इन दो प्रमुख संस्कृतियों के मेल ने समय के साथ भारतीय समाज, धर्म और परंपराओं को आकार दिया।
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शब्दावली
| शब्द | परिभाषा |
| विरासत (Heritage) | हमारे पूर्वजों से हमें मिला एक बहुमूल्य उपहार। |
| संस्कृति (Culture) | जीवन जीने का एक तरीका; यह आदतों, मूल्यों, रीति-रिवाजों, परंपराओं और आदर्शों का कुल योग है। |
| प्राकृतिक विरासत (Natural Heritage) | प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच घनिष्ठ संबंध का परिणाम। इसमें पहाड़, जंगल, नदियाँ, झरने, जानवर आदि शामिल हैं। |
| नेग्रिटोइट (हब्शी) (Negritoit / Habsi) | कुछ इतिहासकारों के अनुसार भारत के सबसे प्राचीन निवासी, जो अफ्रीका से बलूचिस्तान के रास्ते आए थे। |
| ऑस्ट्रेलॉयड (निषाद) (Australoid / Nishad) | दक्षिण पूर्व एशिया से आई एक जनजाति, जिन्हें आर्यों द्वारा ‘निषाद’ कहा जाता था। |
| द्रविड़ (Dravidians) | सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माता माने जाने वाले लोग, जिनकी संस्कृति में मातृदेवी और पितृदेवता की पूजा शामिल थी। |
| आर्य (Aryans) | आर्य सभ्यता के निर्माता, जिन्हें नॉर्डिक-आर्यन्स भी कहा जाता है। वे प्रकृति प्रेमी थे और उन्होंने भजनों (रिचाओं) की रचना की। |
| आर्यावर्त (Aryavrata) | प्राचीन काल में वह क्षेत्र जहाँ आर्यों की घनी आबादी थी। |
| सप्त सिंधु (Sapta Sindhu) | सात नदियों द्वारा सिंचित क्षेत्र, जो आर्यों का प्रारंभिक निवास स्थान था। |
| मंगोलॉयड (किरात) (Mongoloid / Kirat) | उत्तरी चीन से तिब्बत के रास्ते भारत आए लोग, जिनकी पीली रंगत के कारण उन्हें ‘किरात’ के नाम से जाना जाता था। |
| रिचा (Richas) | आर्यों द्वारा सूर्य, हवा और वर्षा जैसे विभिन्न प्राकृतिक तत्वों की प्रार्थना के लिए रचित भजन। |

