Class 10 Hindi Chapter 15 हे जनशक्ति महान !

Class 10 Hindi Solutions 15 हे जनशक्ति महान ! Textbook Questions and Answers
स्वाध्याय
1. निम्नलिखित प्रश्नों के नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर खाली जगह भरिए :
प्रश्न 1.
जनशक्ति की चेतना द्वारा भारत में ……….. लाना चाहिए ।
(अ) नवचेतना
(ब) परिवर्तन
(क) महाक्रांति
(ड) नवयुग
उत्तर :
(अ) नवचेतना
प्रश्न 2.
हम हैं नवयुग के ………. ।
(अ) निर्माता
(ब) वाहक
(क) अग्रदूत
(ड) पहरेदार
उत्तर :
(क) अग्रदूत
2. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :
प्रश्न 1.
कवि ने जनशक्ति को संबोधित करते हुए क्या कहा है ?
उत्तर :
कवि ने जनशक्ति को जगाने का आहवान किया है। उन्होंने जनशक्ति को संबोधित करते हुए कहा है कि वह खुद जायत हो जाए और दूसरों को भी जागरूक करे, ताकि लोगों में चेतना पैदा की जा सके और पृथ्वी पर नए स्वर्ग की रचना हो तथा लोग उसमें सुख-शांति से रहें।
प्रश्न 2.
महाजागरण गर्जन से किसकी प्राप्ति होगी ?
उत्तर :
कवि कहते हैं कि हमें इस धरती पर स्वर्ग की रचना करनी है इसीलिए हमें महाजागरण का महान अभियान चलाना है। इससे हम लोगों में लगातार चेतना लाकर किसानों-मजदूरों को जागृत करेंगे। इस प्रकार महाजागरण गर्जन से देश में चेतना आएगी।
प्रश्न 3.
हम नवयुग के अग्रदूत कैसे बन सकते हैं ?
उत्तर :
हम लोगों के दिलों से असंतोष की भावना दूर करके उनमें संतोष के भाव पैदा करेंगे। पृथ्वी पर हम लोगों को स्वर्ग जैसी सुविधा प्रदान करेंगे। हम उन्नति के पथ पर आगे बढ़ते हुए लोगों का मार्गदर्शन करके नवयुग के अग्रदूत बन सकते हैं।
हे जनशक्ति महान !
3. निम्नलिखित प्रश्नों के सविस्तार उत्तर लिखिए :
प्रश्न 1.
कवि ने मजदूर एवं किसान को क्या प्रेरणा दी है ?
उत्तर :
किसान और मजदूर अपनी मेहनत से खेतों में अन्न उपजाते हैं और कल-कारखानों में तरह-तरह की वस्तुओं का निर्माण करते हैं, जिससे जनता का काम चलता है। कवि ने किसान और मजदूर के श्रम की वंदना कर उन्हें जाग्रत होने की प्रेरणा दी है।
प्रश्न 2.
‘हे जनशक्ति महान’ गीत के माध्यम से कवि ने जनमानस को क्या संदेश दिया है ?
उत्तर :
‘हे जनशक्ति महान!’ गीत के माध्यम से कवि ने जनमानस को जागने और दूसरों में जागरूकता पैदा करने का संदेश दिया है। वे पृथ्वी पर ऐसी दुनिया का निर्माण करना चाहते हैं, जिसमें लोग सुख-सुविधा के साथ शांतिपूर्ण ढंग से रह सकें। वे लोगों में समानता की भावना का प्रसार करना चाहते हैं।
हे जनशक्ति महान !
4. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए :
प्रश्न 1.
- अविराम – …………..
- मेधा – ……………
- अभिमान – ………….
- जलधि – …………….
उत्तर :
- अविराम – अविरत
- मेधा – बुद्धि
- अभिमान – घमंड
- जलधि- सागर
5. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
प्रश्न 1.
- संतोष × ……….
- निर्माण × ……….
- प्रकाश × ……….
- विजय × ……….
उत्तर :
- संतोष × असंतोष
- निर्माण × विनाश
- प्रकाश × अंधकार
- विजय × पराजय
6. निम्नलिखित शब्दों की संधि-विच्छेद कीजिए :
प्रश्न 1.
- उन्नति
- नाविक
- विजयोन्मादी
उत्तर :
- उन्नति = उत् + नति
- नाविक = नौ + इक
- विजयोन्मादी = विजय + उन्मादी
Hindi Digest Class 10 हे जनशक्ति महान ! Important Questions and Answers
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
प्रश्न 1.
हम कैसे नाविक है?
उत्तर :
हम कालरूपी जलधि के नाविक है।
प्रश्न 2.
कवि किसान-मजदूर को क्या मानते हैं?
उत्तर :
कवि किसान-मजदूर को वंदनीय मानते हैं।
प्रश्न 3.
महाजागरण गर्जन से किसकी प्राप्ति होगी?
उत्तर :
महाजागरण गर्जन से लोगों में निरंतर चेतना आएगी।
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए :
प्रश्न 1.
हम हैं नवयुग के अग्रदूत हम काल-जलधि-नाविक अभूत हम साम्य-दीप के नव प्रकाश हम विजयोन्मादी क्रान्ति पूत हे प्रदीप्त गतिमान !
जागो और जगाओ
उत्तर :
उपरोक्त पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि हम नए जमाने के अग्रणी-जन हैं। हम समयरूपी सागर के असाधारण नाविक हैं। हम समानता का प्रकाश फैलानेवाले दीपक की ज्योति से निकले नए प्रकाश की भाँति हैं। हम क्रांति करनेवाले ऐसे सपूत है, जिन पर विजय प्राप्त करने की सनक सवार है। हे गतिमान और प्रदीप्त जनशक्ति! तुम स्वयं जागो और दूसरों को भी जागरूक करो।
हे जनशक्ति महान !
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
प्रश्न 1.
- ‘हे जनशक्ति महान !’ कविता में ………… ग्रह का नाम है। (मंगल, पृथ्वी)
- बादलों की गड़गड़ाहट का दूसरा नाम ……….. है। (गर्जना, तर्जन)
- कवि चाहते हैं कि प्रत्येक मनुष्य को ……….. मिले। (संतोष, समानता)
- कवि चाहते हैं कि देशवासी ………… के पथ पर चलें। (धार्मिक, उन्नति)
- कवि ……….. बढ़ने की इच्छा रखते हैं। (विरत, अविरत)
- कवि ………… को बंदनीय मानते हैं। (माता-पिता, किसान-मजदूर)
- कवि जनशक्ति को जगाकर पृथ्वी पर ……….. बनाना चाहते हैं। (अवकाश, स्वर्ग)
- कवि ज्योति लेकर ……………. पर आगे बढ़ना चाहते हैं। (हिमालय, उन्नति-पथ)
- कवि ……….. जगाना चाहते हैं। (संतोष, प्रेम)
- जनशक्ति की चेतना द्वारा भारत में ………… लाना चाहिए। (नवचेतना, नवजीवन)
उत्तर :
- पृथ्वी
- गर्जना
- संतोष
- उन्नति
- अविरत
- किसान-मजदूर
- स्वर्ग
- उन्नति-पथ
- संतोष
- नवचेतना
व्याकरण
हे जनशक्ति महान !
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
प्रश्न 1.
- पृथ्वी – ………..
- प्रकाश – ………..
- उन्नति – ………..
- कमल – ………..
- मेघ – ………..
- दीप – ………..
- दुनिया – ………..
- आग – ………..
- पथ – ………..
- पूत – ………..
उत्तर :
- पृथ्वी – धरती
- प्रकाश – उजाला
- उन्नति – प्रगति
- कमल – पद्य
- मेघ – बादल
- दीप – चिराग
- दुनिया – संसार
- आग – अग्नि
- पथ – मार्ग
- पूत – पुत्र
- हे जनशक्ति महान !
निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :
प्रश्न 1.
- शक्ति × ……..
- गुरू × ……..
- पृथ्वी × ……..
- स्वर्ग × ……..
- नई × ……..
- बसाना × ……..
- बनाना × ……..
- आग × ……..
- जलाना × ……..
- जागरण × ……..
- मानब × ……..
- उन्नति × ……..
- जीवन × ……..
- महान × ……..
- अविराम × ……..
- अमर × ……..
उत्तर :
- शक्ति × अशक्ति
- गुरू × लघु
- पृथ्वी × आकाश
- स्वर्ग × नरक
- नई × पुरानी
- बसाना × उजाड़ना
- बनाना × बिगाड़ना
- आग × पानी
- जलाना × बुझाना
- जागरण × शयन
- मानव × दानव
- उन्नति × अवनति
- जीवन × मृत्यु
- महान × तुच्छ
- अविराम × सविराम
- अमर × मर्त्य
- हे जनशक्ति महान !
निम्नलिखित संथि को छोड़िए :
प्रश्न 1.
- पृथ्वी – …………..
- ईश्वरेच्छा – ………..
- महोत्सव – ………..
- संतोष – ………..
- दुर्बल – ………..
- अनंत – ………..
उत्तर :
- पृथ्वी = पृथु + ई
- ईश्वरेच्छा = ईश्वर + इच्छा
- महोत्सव = महा + उत्सव
- संतोष = सम् + तोष
- दुर्बल = दु: + बल
- अनंत = अन् + अंत
निम्नलिखित शब्दसमूह के लिए एक शब्द लिखिए :
प्रश्न 1.
- वह लोक जिस पर हम रहते हैं।
- जो खेती करता है।
- जिसका विराम न हो
- जो मरता नहीं है
- होश में आना
- नया युग
- देवताओं का लोक
- जो मिले उसी से प्रसन्न रहने की भावना
- मजदूरी पर गुजारा करनेवाला
- नाव चलानेवाला
- विशेष बुद्धि
उत्तर :
- पृथ्वीलोक
- किसान
- अविराम
- अमर
- चेतना
- नवयुग
- स्वर्ग
- संतोष
- मजदूर
- नाविक
- मेघा
- हे जनशक्ति महान !
निम्नलिखित शब्दों की भाववाचक संज्ञा लिखिए :
प्रश्न 1.
- महान – ………..
- जागना – ………..
- बसाना – ………..
- गरजना – ………..
- मजदूर – ………..
- किसान – ………..
- मानव – ………..
- बढ़ना – ………..
उत्तर :
- महान – महानता
- जागना – जागरण
- बसाना – बस्ती
- गरजना – गर्जन
- मजदूर – मजदूरी
- किसान – किसानी
- मानव – मानवता
- बढ़ना – बढ़ती
निम्नलिखित शब्दों की कर्तृवाचक संज्ञा लिखिए :
प्रश्न 1.
- चेतना – ………..
- श्रम – ………..
- पथ – ………..
- गायन – ………..
- निर्माण – ………..
- प्रकाश – ………..
- नाव – ………..
- ज्योति – ………..
- सुख – ………..
- विजय – ………..
उत्तर :
- चेतना – चेतक
- श्रम – श्रमिक
- पथ – पथिका
- गायन – गायक
- निर्माण – निर्माता
- प्रकाश – प्रकाशक
- नाव – नाविक
- ज्योति – ज्योतिर्धर
- सुख – सुखद
- विजय – विजेता
निम्नलिखित शब्दों की विशेषण संज्ञा लिखिए :
प्रश्न 1.
- वंदन – ………..
- स्वर्ग – ………..
- पृथ्वी – ………..
- संतोष – ………..
- उन्नति – ………..
- ज्योति – ………..
- श्रम – ………..
- प्रकाश – ………..
उत्तर :
- वदन – वंदनीय
- स्वर्ग – स्वर्गीय
- पृथ्वी – पार्थिव
- संतोष – संतुष्ट
- उन्नति – उन्नत
- ज्योति – ज्योतिर्मय
- श्रम – श्रमिक
- प्रकाश – प्रकाशित
निम्नलिखित समास को पहचानिए :
प्रश्न 1.
- जनशक्ति
- महाजागरण
- मजदूर-किसान
- उन्नति-पथ
- नवयुग
- विजयोन्माद
- सुखसर्जन
- काल-जलधि
उत्तर :
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्वन्द्व
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- तत्पुरुष
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
हे जनशक्ति महान ! Summary in Hindi
विषय-प्रवेश :
प्रस्तुत गीत में कवि ने देश की जनता से जाग्रत होने तथा दूसरों को भी जाग्रत करने का आह्वान किया है। कवि देश में क्रांति लाना चाहते हैं और धरती पर लोगों के लिए स्वर्ग के समान सर्व-सुविधा सम्पन्न ऐसा नया संसार बनाना चाहते हैं, जिसमें लोग शांतिपूर्वक रह सके।
कविता का सरल अर्थ :
हे जनशक्ति .. … जागो और जगाओ।
कवि भारत की जनता की शक्ति का आहवान करते हुए कहते हैं कि उसकी शक्ति अपरंपार है। वह अत्यंत गौरवशाली है। वे उसे संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे जनशक्ति! तुम सजग हो जाओ और दूसरों को भी जागरूक करो।
वे कहते हैं कि हमें धरती पर स्वर्ग की रचना करनी है- अर्थात् स्वर्ग जैसी सुविधाएं हमें लोगों को धरती पर उपलब्ध करानी हैं। हमें नए ढंग के संसार का निर्माण करना है। हमें जन-जागरण का महान अभियान चलाकर लोगों में लगातार चेतना लानी है। वे मजदूरों और किसानों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मजदूर किसान भाईयों! जागो और दूसरों को भी जागरूक करो।
हम जलती ……. जागो और जगाओ।
वे कहते हैं कि हम लोगों में व्याप्त असंतोष की भावना दूर करके उनमें संतोष की भावना का विकास करेंगे। हम प्रगति के मार्ग पर मशाल लेकर निरंतर आगे-ही-आगे बढ़ते जाएंगे और लोगों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
हे गौरवशाली जनता, चेतो। तुम दूसरों को भी जागरूक करो।
हम श्रम का ….. जागो और जगाओ।
कवि कहते हैं कि हमारे लिए परिश्रम महत्त्वपूर्ण है और हम उसकी वंदना करते हैं अर्थात मेहनत करनेवाले मजदूर और किसान हमारे लिए वंदनीय हैं। इसी तरह हम बुद्धि का भी सम्मान करते हैं अर्थात् बौद्धिक वर्ग भी हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हम उनका गुणगान करते हैं। हम सब लोगों के लिए सुख-चैन की गर्जना करते हैं। हे जनशक्ति! हमें तुम पर गर्व है। तुम चेतो और दूसरों को भी जागरूक करो।
हम हैं नवयुग ………… जागो और जगाओ।
कवि कहते हैं कि हम नए जमाने के अग्रणी-जन हैं। हम समयरूपी सागर के असाधारण नाविक हैं। हम समानता का प्रकाश फैलानेवाले दीपक की ज्योति से निकले नए प्रकाश की भाँति हैं। हम क्रांति करनेवाले ऐसे सपूत हैं, जिन पर विजय प्राप्त करने की सनक सवार है। हे गतिमान और प्रदीप्त जनशक्ति ! तुम स्वयं जागो और दूसरों को भी जागरूक करो।
ગુજરાતી ભાવાર્થ :
કવિ ભારતની જનતાની શક્તિને આહ્વાન કરતાં કહે છે કે તેની શક્તિ અપરંપાર છે. તે અત્યંત ગૌરવશાળી છે. તેઓ તેને સંબોધિત કરતાં કહે છે કે હે જનશક્તિ ! તું સજાગ થઈ જા અને બીજાઓને પણ જાગ્રત કર,
તેઓ કહે છે કે આપણે ધરતી પર સ્વર્ગની રચના કરવાની છે – અથાત્ સ્વર્ગ જેવી સુવિધાઓ આપણે લોકોને ધરતી પર પ્રાપ્ત કરાવવાની છે. આપણે નવી રીતે સંસારનું નિર્માણ કરવાનું છે. આપણે જન-જાગરણનું મહાન આંદોલન ચલાવીને લોકોમાં સતત ચેતના લાવવાની છે. તેઓ મજૂરો અને ખેડૂતોને સંબોધિત કરતાં કહે છે કે હે મજૂર-ખેડૂત ભાઈઓ ! જાગો અને બીજાઓને પણ જાગ્રત કરો.
તેઓ કહે છે કે લોકોમાં વ્યાપ્ત અસંતોષની ભાવના દૂર કરીને આપણે તેમનામાં સંતોષની ભાવનાનો વિકાસ કરવાનો છે. આપણે પ્રગતિના માર્ગ પર મશાલ લઈને સતત આગળ ને આગળ વધતાં જઈશું અને લોકોનું માર્ગદર્શન કરતા રહીશું. હે ગૌરવશાળી લોકો, ચેતો! તમે બીજાને પત્ત જાગૃત કરો.
કવિ કહે છે કે આપણે માટે પરિશ્રમ મહત્ત્વપૂર્ણ છે અને આપણે હંમેશાં તેને વંદન કરીએ છીએ અર્થાત્ મહેનત કરનારા મજૂર અને ખેડૂત અમારે માટે વંદનીય છે. એવી જ રીતે અમે બુદ્ધિનું પણ સન્માન કરીએ છીએ અથર્ બૌદ્ધિક વર્ગ પણ અમારે માટે ખૂબ મહત્ત્વપૂર્ણ છે. અમે તેમનાં ગુણગાન ગાઈએ છીએ. અમે સૌ લોકો માટે સુખ-શાંતિની ગર્જના કરીએ છીએ. હે જનશકિત! અમને તારા પર ગર્વ છે. તમે સજાગ થાઓ અને બીજાઓને પણ જાગ્રત કરો.
કવિ કહે છે કે આપણે નવા જમાનાના અગ્રણી છીએ. આપણે સમયરૂપી સાગરના અસાધારણ નાવિક છીએ. આપણે સમાનતાનો પ્રકાશ ફેલાવનારા દીપકની જ્યોતિ થકી ઉત્પન્ન થયેલા નવા પ્રકાશ સમાન છીએ. આપણે ક્રાંતિ કરનારા એવા સપૂત છીએ, જેમના મનમાં વિજય પ્રાપ્ત કરવાની ધૂન સવાર છે, હે ગતિશીલ અને પ્રદીપ્ત જનશક્તિ! તમે જાતે જાગો અને બીજાઓને પણ જાગ્રત કરો.
हे जनशक्ति महान ! शब्दार्थ :
- जनशक्ति – जनता की शक्ति।
- महान – बड़ी, ऊंची।
- जागो – सजग हो, जागरूक हो।
- जगाओ – चेतना लाओ, जागरूक करो।
- स्वर्ग – (यहाँ) जहाँ सुख ही सुख हो, वह स्थान।
- बसाना – आबाद करना।
- महाजागरण – लोगों में महान चेतना लाना।
- गर्जन – गरजना।
- अविराम – बिना सुस्ताए, निरंतर, विराम रहित।
- चेतना – जागृति, बुद्धिविवेक से काम लेना।
- बुझाना – शांत करना।
- जगाना – उत्पन्न करना।
- ज्योति – मशाल।
- उन्नति – पथ-प्रगति का मार्ग। अविरत-निरंतर, लगातार।
- गौरव – महत्त्व, बड़प्पन, आदर-सम्मान।
- प्राण – जीव।
- वंदन – स्तुति, पूजन, वंदना।
- मेधा – बुद्धि, शक्ति।
- गायन – गुणगान।
- निर्माण – बनाने की क्रिया, रचना।
- लख – देख।
- जीवन – जिंदगी।
- अभिमान – गर्व।
- नवयुग – नया जमाना।
- अग्रदूत – अग्रणी, पहले से पहुंचकर किसी के आने की सूचना देना।
- काल – महाकाल।
- जलधि – समुद्र।
- नाविक – मल्लाह, नाव खेनेवाला।
- अभूत – असाधारण, जो हुआ न हो।
- साम्य – सादृश्य, समानता।
- दीप – दीपक।
- नव प्रकाश – नया प्रकाश।
- विजयोन्मादी – जिसे विजय पाने की सनक हो।
- क्रांति – स्थिति में भारी उलट-फेर, पूरा बदलाव।
- पूत – पुत्र।
- प्रदीप्त – जगमगाता हुआ, प्रकाशमान।
- गतिमान – गतियुक्त, जो गति में हो।



