Class 10 Social Science Chapter 1 भारत की विरासत

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए ।

प्रश्न 1.
आर्य और द्रविड़ संस्कृति की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
आर्य संस्कृति:

  • भारत में आर्य सभ्यता के निर्माता आर्य (जोर्डिक) थे ।
  • प्राचीन भारत के हिन्दू आर्य कहलाते थे । वे जिन प्रदेशों में रहते थे उसे ‘आर्यवर्त’ नाम दिया गया था ।
  • प्राचीन समय में आर्य जनसंख्या वायव्य भारत में थी, वहाँ सात नदियाँ बहती थी, इसलिए उसे ‘सप्तसिंधु’ नाम दिया गया ।
  • उत्तर वैदिककाल में आर्यावर्त के पूर्व में मिथिला (बिहार) तक और दक्षिण में विंध्याचल तक फैले थे ।
  • अन्य समकालीन प्रजाओं में आर्य सबसे विकसीत प्रजा थी ।
  • आर्य भरत राजा और भरत जाति के नाम से यह विशाल प्रदेश भरतभूमि, भारत उपमाद्वीप, भारत वर्ष जैसे नाम से पहचाना
    जाने लगा ।
  • आर्य प्रकृति प्रेमी थे । वे वृक्षों, पर्वतों, सूर्य, वायु, नदियों, वर्षा आदि की पूजा-अराधना करते थे । जिन्होंने स्तुतियों (ऋचाओं) की रचना की थी।
  • आर्यों ने वेदपठन प्रचलित किया, धार्मिक विधियों, यज्ञादियों को शुरू किया ।
  • भारत में आयी विविध प्रजाओं के साथ आर्यों ने मिश्रित – समन्वयी संस्कृति का निर्माण किया था ।

द्रविड़ संस्कृति:

  • द्रविड़ भारत के मूल नागरिक थे । उन्हें मोहें-जो-दड़ो की सिंधु संस्कृति के सर्जक और पाषाण संस्कृति के निर्माता माना जाता है ।
  • द्रविड़ माता के रूप में देवी (पार्वती) और पितृरुप में परमात्मा (शिव) की आराधना करते थे ।
  • धूप, दीप और आरती से पूजा की परंपरा द्रविड़ प्रजा ने शुरू की थी ।
  • द्रविड़ों के मूलदेवता आर्यों ने स्वीकार की थी, समय बीतने पर उत्तर के प्रचंड प्रभाव के अधीन द्रविड़ों में आर्य संस्कृति गहराई तक व्याप्त हो गयी । अंतरजातीय विवाह भी प्रसारित किये ।
  • द्रविड़ों में मातृ परिवार प्रथा प्रचलित थी । वे अवकाशीय ग्रहों के क्षेत्र में और विविध कलाओं जैसे कताई-बुनाई, रंगना, नाव निर्माण जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण हैं ।
  • आज दक्षिण भारत में द्रविड़ कुल की तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसे भाषाएँ बोलनेवाले लोग बसते है ।

प्रश्न 2.
संस्कृति का अर्थ देकर विस्तार से समझाइए ।
उत्तर:
संस्कृति का अर्थ:
संस्कृति अर्थात् ‘जीवन जीने का तरीका’ । देश और समाज में कालक्रम में बदलाते संजोगों के अनुसार जनजीवन में आनेवाले परिवर्तनों, सुधारों, सामाजिक रीति-रिवाजों आदि के माध्यम से भिन्न संजोगों में संस्कृति बनती है । संस्कृति अर्थात् मानव मन की उपज और उसमें मानव समाज की आदतों, मूल्यों, आचार-विचार, धार्मिक परंपराओं, आवास
और जीवन के उच्च उद्देश्यों की ओर ले जानेवाले आदर्शों का योग है ।

भारत की सांस्कृतिक विरासत:
विरासत अर्थात् हमें हमारे पूर्वजों द्वारा प्राप्त अमूल्य भेट ।
भारत की विरासत को दो भागों में बाँट सकते है:

(1) भारत की प्राकृतिक विरासत: ‘प्रकृति, पर्यावरण और मानवजीवन के बीच निकटता के संबंधों का परिणाम अर्थात् प्राकृतिक विरासत ।’ प्राकृतिक विरासत प्राकृतिक भेट है । भारत की प्राकृतिक विरासत विशिष्य और वैविध्यपूर्ण है । जिसमें ऊँचे पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, सागर, लम्बे समुद्री किनारों, विशाल उपजाऊ मैदान, घाटी प्रदेश, रेगिस्तान का समावेश होता है तथा वृक्षों, जीवजन्तुओं, ऋतुओं, पशु-पक्षियों, वैविध्यपूर्ण भूमि दृश्यों का समावेश होता है । हम सभी प्रकृति की संतान है । प्रकृति हमारे आहार, पानी, शुद्ध वायु, निवास जैसी सभी आवश्यकताएँ पूरी करती है ।

(2) भारत की साँस्कृतिक विरासत: भारत ने जगत को विविधतापूर्ण और समृद्ध विरासत की भेट दी है । साँस्कृतिक विरासत अर्थात् मानवसर्जित विरासत । मानव ने अपने ज्ञान, बुद्धिचातुर्य, योग्यता और कला-कौशल्य द्वारा जो कुछ भी विकसित किया और जिसका सर्जन किया उसे साँस्कृतिक विरासत कहते हैं । आर्यों से शुरू करके, क्षत्रप, कुषाण, हुण, इरानियों, तुर्क, अरबों, मुगल, पारसियों, अंग्रेजों, फ्रेन्च आदि विविध जाति, प्रजातियाँ भारत में आयी । इन सभी के बीच आदान-प्रदान से भारतीय संस्कृति समृद्ध बनी है ।

प्रश्न 3.
‘गुजरात की साँस्कृतिक विरासत’ – विस्तार से समझाइए ।
उत्तर:
साँस्कृतिक, पौराणिक और पुरातत्त्वीय महत्त्व के स्थलों में लोथल, रंगपुर, धोलावीरा, रोजड़ी और श्रीनाथगढ़ आदि महत्त्वपूर्ण है ।

  • वड़नगर का कीर्ति तोरण, जूनागढ़ में सम्राट अशोक के शिलालेख, मोढ़ेरा का सूर्यमंदिर, चांपानेर का दरवाजा, सिद्धपुर का रुद्रमहल, विरमगाँव का मुनसर तालाब, अहमदाबाद की जामा मस्जिद, झूलता मीनार, सीद्दी सैयद की जाली, हटेसिंह का दहेरा, जूनागढ़ का मोहब्बतखाँ का मकबरा, नवसारी का पारसी अगियारी आदि ऐतिहासिक महत्त्व के देखनेलायक स्थान है ।
  • धार्मिक महत्त्व के स्थानों में द्वारका का द्वारकाधीश मंदिर और जगद्गुरु शंकराचार्य की शारदापीठ, 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मंदिर, उत्तर गुजरात में अंबाजी, बहुचराजी और महाकाली माताजी पावागढ़, मीरादातार उनाव में, जैन तीर्थ पालीताणा, रणछोड़रायजी मंदिर डाकोर और शामलाजी आदि तीर्थ स्थल है ।
  • गुजरात में प्रसिद्ध धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन के स्थलों में पोलो, पतंगोत्सव और कांकरिया कार्निवल, तानारी-री महोत्सव, उत्तरार्ध नृत्य महोत्सव, रणोत्सव आदि का आयोजन होता है ।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए ।

प्रश्न 1.
भारतीय विरासत के जतन और संरक्षण के लिए हमारे संवैधानिक कर्तव्य बताइए ।
उत्तर:
हम अपने प्राचीन मूल्य और ऐतिहासिक महत्त्ववाले स्थानों को नुकसान न पहुँचायें, उनका जतन करे इसके लिए संविधान में नागरिक के मूलभूत कर्तव्यों का समावेश किया गया है । जिसके अनुसार हमारे संविधान के अनुच्छेद-51(क) में भारतीय नागरिक के जो मूलभूत कर्तव्य बताए हैं उनमें भी (छ), (ज) और (ट) अर्थात् (6), (7) और (9) में दर्शाए अनुसार:

  • अपनी समन्वित साँस्कृतिक समृद्ध विरासत का मूल्य समझकर, उसकी हिफाजत करने का कर्तव्य ।
  • जंगलों, तालाबों, नदियों और वन्य जीवों (पशु-पक्षियों) सहित प्राकृतिक पर्यावरण का जतन करना और उसमें सुधार करने और सभी जीवों के प्रति अनुकंपा करने का कर्तव्य ।
  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा का त्याग करने का कर्तव्य में समावेश करना ।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक विरासत का अर्थ समझाइए । भारत की प्राकृतिक विरासत में शामिल होनेवाली बातों की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
‘प्राकृतिक, पर्यावरण और मानवजीवन के बीच निकट संबंधों का परिणाम अर्थात् प्राकृतिक विरासत ।’ प्राकृतिक विरासत प्राकृति की भेट है ।

  • भारत की प्राकृतिक विरासत विशिष्ट और वैविध्यपूर्ण है । जिसमें ऊँचे पर्वत, नदियाँ, सागर, झरने, लम्बे समुद्री किनारे, विशाल
    समुद्री खाईयाँ, उपजाऊ मैदान, घाटियों, रेगिस्तान आदि का समावेश होता है ।
  • वृक्षों, वनस्पति, जीवजंतुओं, ऋतुओं, पशु-पक्षियों और वैविध्यपूर्ण भूमि-दृश्यों, विविध प्रकार की चट्टानों, खनिजों आदि का समावेश होता है ।
  • हम प्रकृति का आहार, पानी, शुद्ध वायु तथा निवास जैसी लगभग सभी आवश्यकताओं के लिए सुंदर व्यवस्था की है ।
  • प्रकृति के साथ हमारा व्यवहार श्रद्धापूर्ण होने का उदाहरण पंचतंत्र की कहानियों और बौद्ध जातक कथाओं में दिखाई देता है ।
  • हमारे लोकगीत और शास्त्रीय संगीत भी ऋतुओं और प्रकृति के साथ जुड़े हुए है ।
  • हमारे गीत, त्यौहार, कविताओं, चित्रों में प्रकृति और ऋतुचक्र का निरूपण दिखाई देता है ।
  • निसर्गोपचार, आयुर्वेद, युनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियाँ भी प्रकृति पर आधारित है ।

प्रश्न 3.
भारत की साँस्कृतिक विरासत की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
भारत ने जगत को विविधतापूर्ण और समृद्ध विरासत दी है ।

  • साँस्कृतिक विरासत अर्थात् मानवसर्जित विरासत ।
  • मानव ने अपनी योग्यता, बुद्धिचातुर्य, कला-कौशल्य द्वारा प्राप्त करके, साँस्कृतिक विरासत का सर्जन किया है ।
  • आर्यों से लेकर शक, क्षत्रप, कुषाण, हुण, इरानी, तुर्क, अरब, मुगल, पारसी, अंग्रेज, फ्रेन्च आदि विविध जाति, प्रजाति भारत में आयी । इन सभी के बीच आदान-प्रदान से भारतीय संस्कृति समृद्ध बनी है ।
  • प्रागेतिहासिक समय से भारत ने विश्व की प्रजाओं को साँस्कृतिक विरासतों की अपार भेट दी है । उदाहरण : शिल्पकला 5000 जितनी पुरानी है ।
  • देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, मानवशिल्पों, पशुओं तथा खिलौनों तथा दाढ़ीवाले पुरुष, शिल्प और नर्तकी की मूर्ति देखकर हम अपनी विरासत के प्रति स्वाभिमान अनुभव करते है ।
  • मौर्य युग की उल्टे कमल की आकृति पर सिंह और वृषभ की शिल्प-बुद्ध की प्रजा परंपिता की शिल्प, सारनाथ की धर्मचक्र प्रवर्तनवाली महात्मा गौतम बुद्धवाली प्रतीमा, जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ, राष्ट्रकूट राजाओं की इलोरा की गुफाएँ आदि हमारी साँस्कृतिक विरासत के प्रतीक है ।
  • हमारी साँस्कृतिक विरासत में मंदिरों, शिलालेखों, स्तूपों, विहारों, चैत्यों, मकबरा, मस्जिद, किलों, गुंबजों, राजमहलों, दरवाजों, ईमारतों, उत्खनन के स्थलों का समावेश होता है ।
  • गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, साहित्य, धर्म, युद्धशास्त्र, राज्यशास्त्र, प्राणीशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, वास्तुशास्त्र, न्यायतंत्र, विधिविधान, गणतंत्र आदि विषयों की विरासतीय देन हमें संस्कृति ने दी है ।
  • ब्रह्मदेश में इन प्रजाओं के लक्षण पाये जाते है ।
  • भारत की संस्कृति और सभ्यता के विकास में इस प्रजा का विशेष योगदान पाया जाता है ।
  • वे मिट्टी के बर्तन बनाने, कृषि करने, सुत्ती कपड़े बनाने जैसे कौशल्यों के जानकार थे । वे अपनी धार्मिक मान्यताएँ रखते थे ।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए ।

प्रश्न 1.
आर्य प्रजा अन्य किन नामों से पहचानी जाती थी ?
उत्तर:
आर्य प्रजा नोर्डिक नाम से पहचानी जाती थी । इनकी अधिक जनसंख्यावाले क्षेत्रों को आर्यावर्त और सप्तसिंधु नाम से पहचाना जाता था ।

प्रश्न 2.
नेग्रीटो (हब्सी) प्रजा के विषय में संक्षिप्त टिप्पणी लिखो ।
उत्तर:
नीग्रो अथवा नेग्रीटो (हब्सी) प्रजा भारत के सबसे प्राचीन निवासी है ।

  • कुछ इतिहासकारों के अनुसार नीग्रो प्रजा भारत में बलुचिस्तान से होकर अफ्रीका से आयी थी ।
  • नीग्रो श्याम वर्ण, 4 से 5 फूट ऊँचे और घुघराले बालवाले थे ।

प्रश्न 3.
भारतीय राष्ट्रीय चिह्न (प्रतीक) में कौन-कौन से प्राणियों का समावेश है ?
उत्तर:
भारत का राष्ट्रीय चिह्न (मुद्रा) सारनाथ से लिया गया अशोक स्थंभ है । जिसके ऊपरी भाग में एक-दूसरे के पीठ किये हुए चार शेर है तथा नीचे वृषभ (बैल) और घोड़े की आकृति बनी हुई है ।

4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए ।

प्रश्न 1.
लोकमाता शब्द का उपयोग किसके लिए किया जाता है ?
(A) भारत
(B) प्रकृति
(C) नदियों
(D) पनिहारियों
उत्तर:
(C) नदियों

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सा जोड़ा सही नहीं है ?
(A) शारदापीठ – सोमनाथ
(B) पोलो उत्सव – वड़नगर
(C) उत्तरार्द्धनृत्य महोत्सव – मोढ़ेरा
(D) सीद्दी सैयद की जाली – भावनगर
उत्तर:
(D) सीद्दी सैयद की जाली – भावनगर

प्रश्न 3.
निम्न में से किस भाषा का द्रविड़ कुल की भाषाओं में समावेश नहीं होता है ?
(A) हिन्दी
(B) तमिल
(C) कन्नड़
(D) मलयालम
उत्तर:
(A) हिन्दी

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