Class 9 Hindi Chapter 22 वीरों का कैसा हो वसन्त?

Class 9 Hindi Chapter 22 वीरों का कैसा हो वसन्त?

Class 9 Hindi Textbook Solutions Chapter 22 वीरों का कैसा हो वसन्त?

Class 9 Hindi Solutions वीरों का कैसा हो वसन्त? Textbook Questions and Answers

स्वाध्याय

एक-एक वाक्य में उत्तर दीजिए :

प्रश्न 1.
बार-बार कौन गरजता है?
उत्तर :
बार-बार समुद्र गरजता है।

प्रश्न 2.
प्रकृति के तत्त्व क्या पूछ रहे हैं.?
उत्तर :
प्रकृति के तत्त्व पूछ रहे हैं कि वीरों का बसन्त कैसा होना चाहिए।

प्रश्न 3.
बधु-वसुधा में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर :
वसुधारूपी – वधू का अंग-अंग पुलकित हुआ है।

प्रश्न 4.
कवयित्री कुरुक्षेत्र से क्या कहते हैं?
उत्तर :
कवि कुरुक्षेत्र से कहते हैं कि तुम जागकर देशवासियों को अपने अनन्त अनुभवों के बारे में बताओ।

प्रश्न 5.
कवयित्री की कलम की क्या विशेषता है?
उत्तर :
कवि की कलम की यह विवशता है कि वीरों का वसन्त कैसा हो, यह कुछ खुलकर लिखने की उसे अनुमति नहीं है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
वीरों का कैसा है वसन्त? ऐसा कौन-कौन पूछ रहे है?
उत्तर :
‘वीरों का कैसा हो वसन्त ?’ ऐसा हिमालय पर्वत, सागर, पूर्व-पश्चिम दिशाएँ, पृथ्वी और आकाश तथा क्षितिज भी यही प्रश्न पूछ रहे हैं।

प्रश्न 2.
‘कह दे अतीत अब मौन त्याग’ ऐसा कवयित्रीने क्यों कहा है?
उत्तर :
देश के इतिहास में वीरता और पराक्रम दिखानेवाले अनेक शूरवीर हो गए हैं। इनसे हम अपनी स्वाधीनता और गौरव की रक्षा के लिए बलिदान देने का पाठ सीखते हैं। इसलिए कवयित्री ने ‘कह दे अतीत अब मौन त्याग’ ऐसा कहा है।

प्रश्न 3.
किन ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर कवयित्रीने ‘वीरों का वसन्त’ बताया है?
उत्तर :
हनुमान द्वारा लंका को जलाना (लंकादहन), कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध, हल्दी-घाटी में राणा प्रताप तथा सम्राट अकबर का युद्ध, तानाजी द्वारा सिंहगढ़-विजय ये हमारे इतिहास की बहुत प्रेरक घटनाएं हैं। इन्हीं के आधार पर कवयित्री ने ‘वीरों का वसन्त कैसा हो’ यह बताया है।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए :

प्रश्न 1.
“वीरों का कैसा है वसन्त-” इस पंक्ति को अपने शब्दों में कविता के आधार पर समझाइए।
उत्तर :
वसन्त ऋतु चारों तरफ बिखरे अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण सबसे सुन्दर ऋतु मानी जाती है। सुन्दर, सुगंधित और रंग-रंग के फूल, भौरों का गुंजन, रंग-बिरंगी उड़ती तितलियाँ और सुहावनी हवा इस ऋतु की विशेषताएं हैं। परन्तु यह वीरों का वसन्त नहीं है। वीरों का बसन्त वह है, जिसमें स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए संघर्ष होता है। वीरों का वसन्त वह है, जिसमें अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए शूरवीर हंसते-हंसते अपना बलिदान देते हैं।

प्रश्न 2.
हल्दी-घाटी और सिंह-गढ़ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
मुगल सम्राट अकबर अनेक राजपूत राजाओं को अपने अधीन करना चाहता था, परन्तु सफल नहीं हुआ। महाराणा प्रताप अपनी स्वाधीनता गवाने के लिए तैयार नहीं हुए। अंत में हल्दी-घाटी के मैदान में अकबर और राणा प्रताप की सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ। इसी प्रकार सिंहगढ़ भी मुसलमान शासक के अधीन था। उस पर अधिकार करने के लिए शिवाजी महाराज के वीर सरदार तानाजी ने उस पर आक्रमण किया। कड़ी टक्कर के बाद सिंहगढ़ हाथ में आ गया, पर अद्भुत वीरता दिखाते हुए तानाजी मालसुरे शहीद हो गए। कवयित्री कहना चाहती है कि हल्दी-घाटी और सिंहगढ़ के संघर्ष बताते हैं कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए।

प्रश्न 3.
“है कलम बँघी स्वच्छन्द नहीं”- ससंदर्भ समजाइए।
उत्तर :
‘वीरों का कैसा हो वसन्त?’ यह कविता तब लिखी गई थी जब देश पर अंग्रेजों का शासन था। अंग्रेजी सत्ता ने देश में दमनचक्र चला रखा था। उस समय अंग्रेजों के अन्याय के विरुद्ध लिखना अपराध माना जाता था। ऐसा लिखनेवालों को कड़ी सजा दी जाती थी। उनकी रचनाएँ जप्त कर ली जाती थी। उसी संदर्भ में कवयित्री लिखती है कि मेरे लिखने पर पाबंदी है। मैं चाहूँ तो भी कुछ खुलकर लिख नहीं सकती।

Class 9 Hindi वीरों का कैसा हो वसन्त? Important Questions and Answers

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :

प्रश्न 1.
रंग और रण का विधान कैसे है?
उत्तर :
एक ओर कोयल की तानें और वसन्त के रंग हैं तथा दूसरी ओर मरु पर युद्ध के गीत गाए जा रहे हैं। इस तरह एक-दूसरे की विरोधी प्रवृत्तियों के कारण रंग और रण का विधान है।

प्रश्न 2.
कवयित्री किसे दुर्भाग्य मानती है?
उत्तर :
आज भूषण और चन्द जैसे वीररस के निर्भय कवि नहीं हैं। लोगों में बिजली जैसा जोश और जोश भर देनेवाले छन्दों का भी अभाव है। कवयित्री इस स्थिति को देश का दुर्भाग्य मानती है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए:

प्रश्न 1.
‘वीरों का कैसा हो वसन्त?’ कविता की कवयित्री का नाम लिखिए।
उत्तर :
“वीरों का कैसा हो वसन्त?’ कविता की कवयित्री का नाम सुभद्राकुमारी चौहान है।

प्रश्न 2.
हल्दी-घाटी और सिंहगढ़ किनकी ज्वलंत स्मृतियों को जाग्रत करते हैं?
उत्तर :
हल्दी-घाटी और सिंहगढ़ महाराणा प्रताप और तानाजी मालसुरे की ज्वलंत स्मृतियों को जाग्रत करते हैं।

सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

प्रश्न 1.

  1. आ रही हिमालय से पुकार, है ………… गरजता बार-बार। (उदधि, समुद्र)
  2. फूली ………….. ने दिया रंग, मधु लेकर आ पहुंचा अनंग। (राई, सरसों)
  3. कह दे ……. अब मौन त्याग, लंके! तुझ में क्यों लगी आग? (अतीत, वसन्त)
  4. भूषण अथवा कवि चन्द नहीं, ………. भर दे वह छन्द नहीं। (विद्युत, बिजली)
  5. फिर हमें ……. कौन? इन्त! (चेतावें, बतायें)

उत्तर :

  1. उदधि
  2. सरसों
  3. अतीत
  4. बिजली
  5. बतायें

निम्नलिखित विधान ‘सही’ हैं या ‘गलत’ यह बताइए :

प्रश्न 1.

  1. चारों ओर से एक ही प्रश्न सुनाई देता है – बीरों का कैसा हो वसन्त?
  2. कामदेव भी अपनी मदिरा लेकर आ पहुंचा है।
  3. पृथ्वी अप्रसन्न है।
  4. लंका और कुरुक्षेत्र में भी वीरों ने पराक्रम दिखाया था।

उत्तर :

  1. सही
  2. सही
  3. गलत
  4. सही

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. सरसों किस ऋतु में फूली हैं?
  2. एक ओर रंग हैं तो दूसरी ओर क्या है?
  3. काव्य के अनुसार वीरता किसकी प्रसिद्ध है?
  4. भूषण और चंदबरदाई किस रस के कवि थे?

उत्तर :

  1. वसंत ऋतु में
  2. रण
  3. वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप की
  4. वीर रस के

निम्नलिखित प्रश्नों के साथ दिए गए विकल्पों से सही विकल्प चुनकर उत्तर लिखिए :

प्रश्न 1.
दिग्-दिगन्त क्या पूछ रहे हैं?
A. वसन्त के वीर कैसे हैं?
B. बागों में वसन्त कब आएगा?
C. वीरों का वसन्त कब आएगा?
D. वीरों का वसन्त कैसा हो?
उत्तर :
D. वीरों का वसन्त कैसा हो?

प्रश्न 2.
अनंग क्या लेकर आ पहुंचा है?
A. मस्ती
B. मधु
C. पराग
D. रंग
उत्तर :
B. मधु

प्रश्न 3.
मिलने कौन आए हैं?
A. आदि-अंत
B. पूर्व-पश्चिम
C. उत्तर-दक्षिण
D. अनादि-अनंत
उत्तर :
A. आदि-अंत

प्रश्न 4.
छंद कैसा नहीं है?
A. बिजली भर देनेवाला
B. जगा देनेवाला
C. आनंदित कर देनेवाला
D. मदमस्त कर देनेवाला
उत्तर :
A. बिजली भर देनेवाला

प्रश्न 5.
कलम कैसी नहीं है?
A. बिजली भर देनेवाली
B. जगा देनेवाली
C. आनंदित कर देनेवाली
D. मदमस्त कर देनेवाली
उत्तर :
B. जगा देनेवाली

निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. प्राची
  2. उदधि
  3. दिग्
  4. मधु
  5. वधू
  6. वसुधा
  7. अतीत
  8. विधान
  9. मौन
  10. घमंड
  11. कोकिला
  12. मरु
  13. स्मृति

उत्तर :

  1. पूर्व दिशा
  2. समुद्र
  3. दिशा
  4. शहद
  5. बहू
  6. पृथ्वी
  7. भूतकाल
  8. पद्धति
  9. चुप्पी
  10. अभिमान
  11. कोयल
  12. रेगिस्तान
  13. स्मरण

निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. प्राची
  2. अतीत
  3. वसन्त
  4. वीर
  5. अभिमान

उत्तर :

  1. प्रतिची
  2. वर्तमान
  3. पतझड़
  4. कायर
  5. निरभिमान

निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से भाववाचक संज्ञा पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. वीरों की शूरवीरता हम सबको सदैव प्रोत्साहित करती रहती है।
  2. कवयित्री ने शूरवीरों का उत्साह बढ़ाने का प्रयास किया है।
  3. वीरों को अपने शौर्य पर पुरस्कृत किया जाता है।
  4. हमारे वीरों ने दुश्मनों के घमंड को चूर-चूर कर दिया।

उत्तर :

  1. शूरवीरता
  2. उत्साह
  3. शौर्य
  4. घमंड

निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. वसुधा के अंग-अंग पुलकित हो उठते हैं।
  2. उनकी कलम पर पाबन्दी लगी है वह स्वच्छंद नहीं है।
  3. ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर वीरों का वसन्त कैसा होता है?
  4. उनकी ज्वलंत स्मृतियाँ हमारे हृदय में रोमांच खड़ा कर देती हैं।

उत्तर :

  1. पुलकित
  2. स्वच्छंद
  3. ऐतिहासिक
  4. ज्वलंत

निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. प्राकृत
  2. प्रसिद्ध
  3. अनीति
  4. अन्याय
  5. आकर्षक
  6. दुर्भाग्य
  7. प्रताप
  8. अतिरिक्त
  9. स्वाभिमान
  10. विशेष
  11. सुभद्रा
  12. विजय
  13. परिवर्तन
  14. अनुभव
  15. विवश
  16. अप्रसन्न
  17. अनुसार
  18. अनादि
  19. अनंत
  20. अभिमान
  21. पुरस्कृत
  22. उत्साह
  23. स्वच्छंद
  24. निरभिमान

उत्तर :

  1. प्राकृत – प्र + आकृत
  2. प्रसिद्ध – प्र + सिद्ध
  3. अनीति – अ + नीति
  4. अन्याय – अ + न्याय
  5. आकर्षक – आ + कर्षक
  6. दुर्भाग्य – दुः (दुर) + भाग्य
  7. प्रताप – प्र + ताप
  8. अतिरिक्त – अति + रिक्त
  9. स्वाभिमान – स्व + अभिमान
  10. विशेष – वि + शेष
  11. सुभद्रा – सु + भद्रा
  12. विजय – वि + जय
  13. परिवर्तन – परि + वर्तन
  14. अनुभव – अनु + भव
  15. विवश – वि + वश
  16. अप्रसन्न – अ + प्रसन्न
  17. अनुसार – अनु + सार
  18. अनादि – अन् + आदि
  19. अनंत – अन् + अंत
  20. अभिमान – अभि + मान
  21. पुरस्कृत – पुरः + कृत
  22. उत्साह – उत् + स + आह
  23. स्वच्छंद – स्वः + छंद
  24. निरभिमान – निर + अभिमान

निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय पहचानकर लिखिए :

प्रश्न 1.

  1. प्राकृतिक
  2. शौर्य
  3. आकर्षक
  4. पाबन्दी
  5. आजादी
  6. वीरता
  7. क्षितिज
  8. विवशता
  9. आनंदित
  10. देनेवाली
  11. वासंती
  12. चुप्पी
  13. कोकिला
  14. शूरता
  15. ऐतिहासिक
  16. प्रोत्साहित
  17. कृतज्ञ
  18. कृतज्ञता
  19. पुलकित

उत्तर :

  1. प्राकृतिक – प्रकृत + इत
  2. शौर्य – शूर + य
  3. आकर्षक – आकर्ष + क
  4. पाबन्दी – पाबंद + ई
  5. आज़ादी – आज़ाद + ई
  6. वीरता – वीर + ता
  7. क्षितिज – शिति + ज
  8. विवशता – विवश + ता
  9. आनंदित – आनंद + इत
  10. देनेवाली – देना + वाली
  11. वासंती – वसंत + ई
  12. चुप्पी – चुप + ई
  13. कोकिला – कोकिल + इला
  14. शूरता – शूर + ता
  15. ऐतिहासिक – इतिहास + इक
  16. प्रोत्साहित – प्रोत्साहन + इत
  17. कृतज्ञ – कृत + ज्ञ
  18. कृतज्ञता – कृत + ज्ञ + ता
  19. पुलकित – पुलक + इत

वीरों का कैसा हो वसन्त? Summary in Gujarati

ગુજરાતી ભાવાર્થ :

હિમાલય પોકાર કરીને અને સાગર ગરજી-ગરજીને વારંવાર પૂછી રહ્યો છે. પૂર્વ, પશ્ચિમ, પૃથ્વી, આકાશ – બધાં પૂછી રહ્યાં છે કે વીરોની વસંતઋતુ કેવી હોવી જોઈએ?

સરસવ પર ફૂલ આવી ગયાં છે. તેનાથી વાતાવરણ પીળું થઈ ગયું છે. કામદેવ પોતાની મદિરા લઈને આવી પહોંચ્યા છે. પૃથ્વી પણ નવવધૂ જેવી સજીને પ્રસન્ન થઈ રહી છે, પરંતુ નાયક(વીરપુરુષ)ને આમાં રુચિ નથી. તે વીર વેશ ધારણ કરીને એ બતાવવા ઇચ્છે છે કે વીરોની વસંતઋતુ કેવી હોવી જોઈએ?

આ બાજુ કોયલ શાનથી કૂહૂ-કૂહૂ કરી રહી છે. પેલી બાજુ યુદ્ધનાં વાજાં વાગી રહ્યાં છે. એક બાજુ વસંતઋતુનો રંગ છે અને બીજી બાજુ યુદ્ધની તૈયારી થઈ રહી છે. એમ લાગે છે કે આદિ અને અંતના સ્વરૂપમાં જીવનના બે છેડા મળવા આવ્યા છે અને પૂછી રહ્યા છે કે વીરોની વસંતઋતુ કેવી હોવી જોઈએ?

હે ભૂતકાળ! હવે તું ચૂપ રહીશ નહિ અને વીરોને વસંતઋતુનું અસલી સ્વરૂપ બતાવી દે. હે લંકા! તું પણ બતાવી દે કે તારામાં હનુમાને આગ શા માટે લગાડી હતી? હે કુરુક્ષેત્ર! તું પણ જાગીને બતાવી દે કે મહાભારતનું યુદ્ધ શા માટે થયું હતું? તું વીરોને બતાવી દે કે વસંતઋતુ કેવી હોવી જોઈએ?

હલ્દીઘાટીના પથ્થરો અને સિંહગઢના મજબૂત કિલ્લા ! તમે પણ મહારાણા પ્રતાપ અને તાનાજીના સ્વાભિમાનને યાદ કરીને પોતાના સમયની સ્મૃતિઓને ફરીથી તાજી કરી લો અને બતાવી દો કે વીરોની વસંતઋતુ કેવી હોવી જોઈએ?

આજે કવિ ભૂષણ અને ચંદબરદાઈ જેવા વીરરસના કવિઓ નથી. એવા છંદ પણ નથી કે જેને સાંભળીને લોકોમાં વીજળી જેવી બલિદાનની ભાવના સળવળી ઊઠે. આ ઉપરાંત અમારી કલમ પર પણ પ્રતિબંધ લાગેલો છે. સ્પષ્ટ શબ્દોમાં કંઈ પણ લખવું સંભવ નથી. હે દુર્ભાગ્ય ! પછી અમને કોણ બતાવશે કે વીરોની વસંતઋતુ કેવી હોય છે?

वीरों का कैसा हो वसन्त? Summary in English

The Himalayas is shouting and the ocean is roaring often and often. The east, the west, the earth, the sky – All are asking how should the spring of the brave be?

The flowers on Sarasav have blossomed. So the atmosphere has become yellow. Kamdev has arrived taking wine. The earth has also put on clothes and ornaments like a bride and is pleased, but the hero (brave person) has no interest in it. The brave person wants to show how should the spring of the brave be?

Here a cuckoo is singing gracefully saying ‘kuhu-kuhu’. The drums of war are being beaten there. One side there is a colour of spring and on the other side there is a preparation of war. It seems that the two ends of life have come in the form of beginning and ending and are asking how should the spring of the brave be?

O past! now don’t be quiet and show your original form of spring to the brave. O Lanka! you also show that why Hanuman had burnt Lanka and O Kurukshetra! you also awake and show why there had been the Mahabharat war and show how should the spring of the brave be?

O Haldighati’s stones and strong forts of Sinhghadh! you also recall self-respect of Maharana Pratap and Tanaji. You also recall memories of your time and show the brave how should their spring be?

There are no poets of herolsm like the poets Bhooshan and Chandarbal today. There are no such chhand (poetic metre) that the people hear and have engerness to sacrifice. Besides, we have also restriction on our pens. It is impossible to write anything in plain words. O unluck! Then who will show us how should the spring of the brave be?

वीरों का कैसा हो वसन्त? Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :

वसन्त ऋतु अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। प्रकृति का हर रूप इस ऋतु में निखर उठता है, परंतु वीरों को प्रकृति के इस सौन्दर्य में रुचि नहीं होती। उन्हें तो उन शत्रुओं से लड़ने और उन्हें परास्त करने में रुचि होती है, जो अनीति और अन्याय के सिवा कुछ नहीं जानते। उन्हें बाग-बगीचे नहीं, बल्कि वे स्थान पसंद होते हैं, जहाँ शौर्य और पराक्रम के फूल खिलते हैं। प्रस्तुत कविता में कवयित्री ने यही बताया है कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए।

कविता का सार :

  • चारों ओर से एक ही प्रश्न : हिमालय पर्वत, गरजता हुआ सागर, पूर्व, पश्चिम आदि सब दिशाएं एक ही प्रश्न पूछ रही है कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए?
  • प्रकृति का आकर्षक रूप : वसन्त ऋतु में सरसों फूली है। कामदेव भी अपनी मदिरा लेकर आ पहुंचा है। पृथ्वी भी प्रसन्न है। किन्तु वीर पुरुष (नायक) को इसमें रुचि नहीं है। वह तो यह दिखाना चाहता है कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए।
  • आदि-अंत का मिलन : इधर कोयल कूक रही है और उधर युद्ध के वाद्य (बाजे) बज रहे हैं। एक ओर रंग है, दूसरी ओर रण है। ऐसा लगता है जैसे जीवन के दोनों छोर (आदि और अन्त) आज मिलकर पूछ रहे हैं कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए?
  • अतीत ही प्रश्न का उत्तर देगा : लंका और कुरुक्षेत्र में हुए वीरों के पराक्रम ही वीरों का बसन्त कैसा हो, इस प्रश्न का उत्तर दे सकेंगे।
  • राणा-ताना की शौर्य गाथाएँ : राणा प्रताप और तानाजी मालसुरे की वीरता और बलिदान वीरों के वसन्त की यादें ताजा कर देंगे।
  • बताने की आजादी नहीं : आज भूषण और चंद बरदाई जैसे वीररस के कवि भी नहीं हैं और कलम पर भी पाबंदी है, फिर हमें कौन बताए कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए।

टिप्पणियाँ :

  • भूषण – ये वीररस के कवि थे। छत्रपति शिवाजी के दरबार में इनका प्रतिष्ठित स्थान था।
  • चन्द – चन्द बरदाई। ये पृथ्वीराज चौहाण के मित्र और वीररस के कवि थे। इन्होंने पृथ्वीराज चौहान की वीरता का वर्णन करते हुए ‘पृथ्वीराज रासो’ की रचना की है।
  • तानाजी – छत्रपति शिवाजी की सेना के वीर योद्धा और स्वामिभक्त पुरुष। इन्होंने सिंहगढ़ किला जीता था, पर स्वयं युद्ध में मारे गए थे।
  • राणा – महाराणा प्रताप जिन्होंने हल्दी-घाटी के मैदान में सम्राट अकबर से युद्ध किया था।

कविता का अर्थ :

वीरों का ……. हो वसन्त?

हिमालय पुकार कर पूछ रहा है। सागर भी गरज-गरजकर बारबार कह रहा है; पूर्व, पश्चिम, पृथ्वी, आकाश सब यही पूछ रहे हैं कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए?

फूली सरसों ……. वसन्त?

सरसों में फूल आ गए हैं। उनसे वातावरण को पीला रंग मिल गया है। कामदेव अपनी मदिरा लेकर आ पहुंचा है। पृथ्वी भी नववधू जैसी सजकर प्रसन्न हो रही है। परन्तु नायक (वीरपुरुष) को इसमें दिलचस्पी नहीं है। वह वीर वेश धारण कर यह बताना चाहता है कि वसन्त कैसा होना चाहिए?

भर रही …….. बसन्त?

इधर कोयल ताने भर-भरकर कूक रही है और उधर युद्ध के बाजे बज रहे हैं। एक ओर वसन्त का रंग है और दूसरी ओर युद्ध की तैयारी है। ऐसा लगता है जैसे आदि और अन्त के रूप में जीवन के दो पहलू मिलने आए हैं और पूछ रहे हैं कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए?

कह दे अतीत ……… बसन्त?

हे अतीत! अब तुम चुप मत रहो और वीरों के वसन्त के असली रूप के बारे में बता दो। हे लंके! तुम भी बता दो कि तुम में हनुमान महाभारत का युद्ध क्यों हुआ था? तुम सबको बतादो कि वोरों का वसन्त कैसा होना चाहिए?

हल्दी-घाटी ……. वसन्त?

हल्दी-घाटी के पत्थरों और सिंहगढ़ के मजबूत किले! तुम महाराणा प्रताप और तानाजी के स्वाभिमान को याद कर अपने समय की यादें फिर से ताजा कर दो और बता दो कि वीरों का वसन्त कैसा होना चाहिए?

भूषण ……. वसन्त?

आज भूषण अथवा चंदबरदाई जैसे वीररस के कवि नहीं हैं। ऐसे छन्द भी नहीं है जिन्हें सुनकर लोगों में बिजली भर जाए। इसके अतिरिक्त हमारी कलम पर भी पाबन्दी लगी है। खुलकर कुछ लिखना भी संभव नहीं है। दुर्भाग्य हे! फिर हमें कौन बताए कि वीरों का बसन्त कैसा होता है?

वीरों का कैसा हो वसन्त? शब्दार्थ :

  • हिमाचल – हिमालय पर्वत।
  • उदधि – सागर।
  • प्राची – पूर्व दिशा।
  • भू – भूमि, पृथ्वी।
  • नभ – आकाश।
  • दिग-दिगन्त – दिशा और उसका छोर।
  • मथु – शहद, शराब, मदिरा।
  • वधू – विवाह के लिए तैयार कन्या।
  • वसुधा – पृथ्वी।
  • कोकिला – कोयल।
  • मरु – रेगिस्तान।
  • रण – युद्ध।
  • विधान – तरीका, पद्धति।
  • अतीत – बीता हुआ समय।
  • मौन – चुप्पी।
  • कुरुक्षेत्र – दिल्ली के पास का वह मैदान जहाँ महाभारत का युद्ध हुआ था।
  • हल्दी – घाटी-वह रणभूमि जहाँ राणा प्रताप और अकबर की सेनाएँ लड़ी थीं।
  • राणा – मेवाड़ के राणा प्रताप।
  • ताना – तानाजी मालसुरे।
  • स्मृतियाँ – यादें।
  • छन्द – काव्यरचना।
  • स्वच्छंद – पूरी तरह स्वतंत्र।
  • हन्त – दुर्भाग्य।

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