दीवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्व है। इसे “रोशनी का त्योहार” भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन लाखों-करोड़ों दीपक जलाए जाते हैं और अंधकार को दूर किया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।पौराणिक कारणदीवाली मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। सबसे प्रमुख कथा भगवान श्रीराम की है। त्रेता युग में राक्षसों के राजा रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था। श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण और भक्त हनुमान के साथ मिलकर रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया। जब 14 वर्षों के वनवास के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने दीप जलाकर, घर सजाकर और आतिशबाज़ी करके उनका भव्य स्वागत किया। तभी से हर वर्ष इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।इसके अतिरिक्त, यह पर्व भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी से भी जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए खातों की शुरुआत करता है और इसे नया वित्तीय वर्ष मानता है।एक अन्य कथा के अनुसार, नरकासुर नामक दानव का वध भी दीपावली से जुड़ा है। श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16,000 कन्याओं को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। यह घटना भी दीपावली की पूर्व संध्या, यानी नरक चतुर्दशी पर हुई थी।धार्मिक महत्वदीवाली अंधकार से प्रकाश और बुराई से अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भगवान राम की विजय हमें यह सिखाती है कि चाहे अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, सत्य और धर्म की जीत निश्चित है। माता लक्ष्मी की पूजा हमें यह संदेश देती है कि समृद्धि और धन तभी टिकते हैं जब जीवन में स्वच्छता, ईमानदारी और मेहनत हो।दीपावली के पाँच दिन विशेष माने जाते हैं –
1. धनतेरस – स्वास्थ्य और धन की देवी धन्वंतरि व लक्ष्मी की पूजा।
2. नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली) – नरकासुर वध की स्मृति।
3. मुख्य दीपावली – लक्ष्मी-गणेश पूजा और दीप जलाना।
4. गोवर्धन पूजा/अन्नकूट – श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा।
5. भाई दूज – भाई-बहन के प्रेम का पर्व।सामाजिक महत्वदीवाली का एक बड़ा पहलू यह है कि यह समाज में भाईचारे और एकता को बढ़ाती है।
इस अवसर पर लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, सड़कों और बाजारों को सजाते हैं। परिवार और रिश्तेदार आपस में मिलते हैं, मिठाइयाँ और उपहार बाँटते हैं। यह एक ऐसा समय होता है जब लोग अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के करीब आते हैं।बच्चे पटाखों का आनंद लेते हैं, हालांकि आजकल पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से पटाखों का सीमित प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद, दीवाली का उत्साह हर उम्र के लोगों में देखने को मिलता है।आर्थिक महत्वदीवाली का पर्व व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत खास होता है। इस समय लोग नए कपड़े, आभूषण, बर्तन, गाड़ियाँ और घर खरीदते हैं। बाजारों में खूब रौनक रहती है। व्यापारी इस समय साल का सबसे ज्यादा व्यापार करते हैं।सोने-चाँदी और धनतेरस पर बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इस प्रकार, दीपावली न केवल धार्मिक पर्व है बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाती है।वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोणदीवाली से जुड़े कई वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं। वर्षा ऋतु के बाद जब वातावरण में नमी और गंदगी बढ़ जाती है, तब घरों की सफाई करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। दीयों का प्रकाश वातावरण को शुद्ध करता है और कीटाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है।हालाँकि, आधुनिक समय में पटाखों से होने वाला प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है। वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण दोनों ही स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। इसलिए आजकल “ग्रीन दीवाली” मनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें दीपक जलाना, मिठाई बाँटना और पर्यावरण-मित्र उत्सव मनाना प्रमुख होता है।आध्यात्मिक महत्वदीवाली हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में आंतरिक अंधकार को दूर करना जरूरी है। जैसे दीपक जलाने से बाहर का अंधकार दूर होता है, वैसे ही ज्ञान, सत्य और सद्गुणों का प्रकाश हमारे भीतर के अज्ञान और बुराई को दूर करता है। यह पर्व आत्मशुद्धि और आत्मविकास का प्रतीक है।निष्कर्षदीवाली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। यह हमें सिखाता है कि मेहनत, सत्य, धर्म और प्रकाश ही स्थायी हैं। यह परिवार और समाज को जोड़ने का अवसर है। यह अर्थव्यवस्था को गति देता है और हमारे जीवन में आनंद और उत्साह भरता है।इसलिए हम हर वर्ष दीपावली को हर्षोल्लास, श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाते हैं। यह पर्व हमें हमेशा यह याद दिलाता है कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, अंततः प्रकाश की जीत होती है।
